पुलिस के सामने बोला आरिफ, में आयशा और उसके बच्चे को अपनाना चाहता था, इधर आखरी बातचीत में…

दिल्ली: आपने हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद की लड़की आयशा की कहानी से तो ज़रूर वाकिफ हो गए होंगे. इस लड़की ने अहमदाबाद की साबरमती नदी में कू#द कर अपनी जा’न दे दी थी। जिसका उसने एक विडियो भी बनाकर शेयर किया था और उसमें उसने अपने पति पर उसके द्वारा किये गए उत्पी##न के आ’रोप भी लगाए थे.

साबरमती नदी में आयशा के इस तरह से कू’द कर जा’न देने से पहले जो वीडियो बनाया था, उसके बाद से देश भर में ये विडियो वायरल हुआ था. आयशा के इस विडियो की वजह से उन लाखों लड़कियों के बारे में सोचने पर म’जबू’र होना पढ़ रहा है, जो बेटियां मध्ध्यम वर्ग या उससे नीचे के तब’के से आती हैं.

आरिफ बोला में उसे और उसके बच्चे को अपनाना चाहता था

Aysha Arif Story

आयशा के पति आरिफ ने गिरफ्तार होने के बाद पुलिस के सामने यह कुबूला है. में आयशा और उसके बच्चे को अपनाने के लिए तैयार था. लेकिन शायद अब बहुत देर हो चुकी है. इधर आयशा के पिता की इच्छा है कि आरिफ को उसके किये कर्मों की स’ज़ा ज़रूर मिले.

गुजरात की इस लड़की आयशा के जाने के बाद, सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक हजारों, लाखों लोगों के दिलों में दहेज को लेकर जो फिकर सामने आई है, उसकी वजह से देश भर में एक बार फिर कई मु’स्लिम सं’गठनों और कई पार्टी के नेता लोगों ने इस बात पर गौर किया है, कि लड़कियों की शादी में द’हेज का लें दें पूरी तरह से बंद होना चाहिए.

हालांकि इस्लाम के अनुसार, लड़की के परिवार वालों से किसी भी तरह से दहे’ज की मांग करना या दहेज लेना मना बताया गया है, लेकिन कुछ पैसे वाले लोग दिखावे के लिए ब’ढ़-च’ढ़कर द’हेज देते हैं. लेकिन उस समय वह यह नहीं सोचते किस तरह से वह समाज के गरीब तक तबके की बेटियों के लिए एक बड़ी मु’सी’त ख’ड़ी कर रहे हैं.

अपने विचारों को सोशल मीडिया के ज़रिये ज़ाहिर करना कब काम आयेगा

सोशल मीडिया में आयशा का वीडियो वायरल होने के बाद, ऑल इंडिया मु’स्लिम पर्स’नल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महल ने, इस मसले पर देश भर की सभी मस्जिदों के इमामों को इस मामले में जागरूकता फैलाने और लोगों को जागरूक करने की अपील की.

मौलाना खालिद रशीद फरंगी महल, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं, और साथ ही साथ मु’स्लिम पर्स’नल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य भी रहे हैं.

वैसे इन मौलाना साहब ने पहले भी मु’स्लि’म समाज के लोगों को, द’हेज को लेकर जागरूक करने की कोशिश की थी लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.

आज तक न जाने ऐसी कितनी लड़कियों की जा’न चली गयी, मगर कुछ नहीं हुआ

इसके बाद फिर आयशा की मौ#त के बाद इन्होंने ये बयान जारी कर देश भर के मु’स्लिम समाज के लोगों से अपील की है कि बेटियों की शादी में, ना तो दहे’ज दें और न लड़के वाले द’हेज़ लें. लड़के वालों से ये अपील भी की है कि वह लड़की वालों से किसी भी तरह की द’हेज को लेकर मांग ना करें.

इधर सोशल मीडिया से लेकर, कई गैर मु’स्लिम समाज के लोगों ने और नेताओं ने भी अपील की है कि देशभर में यह द’हेज की र’सम बंद होना ही चाहिए.

क्योंकि गरीब परिवारों की बेटी शादी करते समय, दहेज की वजह से काफी प’रेशा’न होती हैं. या ऐसी लड़कियों की अगर शादी भी हो भी जाती है, तो उसके बाद वह ससुराल में ठीक तरह से सुखी नहीं रहती.

दिल्ली (नोएडा) के रहने वाले ज़ुबैर शैख़, पिछले 10 वर्षों से भारतीय राजनीती पर स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के तौर पर कई न्यूज़ पोर्टल और दैनिक अख़बारों के लिए कार्य करते हैं।