प्रशांत भूषण के समर्थन में आये SC-HC के 3000 से ज्यादा जज और वकील, शुरू हुआ..

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की अवमानना का दोषी करार दिया हैं, इसके साथ ही कोर्ट जल्द ही इस मामले में उन्हें सजा भी सुना सकती हैं. इसी बीच अब वकील प्रशांत भूषण के समर्थन में सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया गया है. जानकारी के अनुसार कई वरिष्ठ वकील और कई जज वकील प्रशांत भूषण के समर्थन में सामने आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक इनकी संख्या 3000 पहुंच चुकी हैं.

इन लोगों का सुझाव हैं कि कोर्ट को अपना फैसला तब तक नहीं अमल में लाना चाहिए जब तक कि कोरोना महा’मारी के बाद शुरू होने वाली कोर्ट की नियमित सुनवाई वाली बड़ी बेंच इसका रिव्यु न कर ले.

वहीं प्रशांत भूषण के समर्थन में आने वाले वकीलों में जनक द्वारकादिश, जयंत भूषण, नवरोज एच सीरवई, दाईरस जे खम्बाता, अरविंद दातार, हुफेजा अहमदी, सीयू सिंह, श्याम दीवान, संजय हेगड़े, मिहिर देसाई और मेनका गुरुस्वामी के नाम प्रमुख हैं.

एक मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इसके लिए तैयार की गई एप्लीकेशन पर 3000 से ज्यादा वकीलों के आलावा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 13 जजों ने भी अपने दस्तखत किये हैं. वहीं न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार इनकी संख्या 41 ही है.

भूषण का समर्थन करने वाले जजों और वकीलों ने कोर्ट को अपनी राय देते हुए कहा है कि हमे पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 72 घंटे के दौरान उठी सभी आवाज़ों को सुना होगा और न्याय को ख’त्म होने से रोकने हेतु सुधर करने वाले जरुरी कदम उठाए जाएंगे, जिससे आम लोगों में एक बार फिर से कोर्ट के प्रति विश्वास और सम्मान जाग सकें.

वहीं सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण की स’जा को लेकर 20 अगस्त को सुनवाई होना हैं. कोर्ट ने उन्हें पहले ही दोषी करार दे चूका हैं ऐसे में अब सिर्फ स;जा सुनना ही बाकि हैं. भूषण को जिस धारा के तहत दोषी पाया गया हैं उसके तहत 6 महीने की सजा या 2 हजार रुपये का जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है.

आपको बता दें कि प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई के अवमानना करने के मामले में 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पाया था. आपको बता दें कि प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया थे.

उन्होंने 27 और 29 जून को ट्वीटर पर दो ट्वीट किए थे जिसमें पिछले चीफ जस्टिस और वर्तमान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर सवाल खड़े किये गए थे. इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लेते हुए भूषण के खिलाफ नोटिस जारी करके मामले की सुनवाई शुरू की थी.