CAA के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्ताव, 24 देशों के 154 सदस्यों ने दिया अपना समर्थन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्ताव पारित पेश किया गया है। जिसमे 154 सोशलिस्ट्स और डेमोक्रेट्स सदस्यों के ग्रुप ने इस प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया है। प्रस्तावित प्रस्ताव में न केवल सीएए को भेदभावपूर्ण और ख’तरनाक रूप से विभाजनकारी के रूप में वर्णित किया गया है।

बल्कि इसे नागरिक और राजनीतिक अधिकारों (ICCPR) और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों पर अंतर्राष्ट्रीय करार के तहत भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का भी उल्लंघन है, जिसके लिए नई दिल्ली एक हस्ताक्षरकर्ता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इस कानून से दुनिया में सबसे बड़ी अराजकता का माहौल पैदा करने की क्षमता है।

धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव

प्रस्ताव में कहा गया है कि इस कानून के तहत समान सुरक्षा के सिद्धांत पर अमेरिका ने भी सवाल खड़े किए हैं। 24 देशों के यूरोपीय संसद के 154 सदस्यीय सोशलिस्ट्स और डेमोक्रेट्स ग्रुप के सदस्यों द्वारा इस सप्ताह के शुरुआत में यह प्रस्ताव पेश किया है जिस पर अगले सप्ताह चर्चा होने की उम्मीद है।

आपको बता दें यह प्रस्ताव यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों के भारत में पदस्थापित प्रतिनिधियों की भारतीय अधिकारियों के साथ अपने संवादों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव के मुद्दे को शामिल करने का आह्वान करता है।

प्रस्ताव इस तथ्य को दर्शाता है कि भारत ने अपनी शरणार्थी नीति में धार्मिक मानदंडों को शामिल किया है। लिहाजा, यूरोपीय संघ के अधिकारियों से शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुनिश्चित करने और भेदभावपूर्ण प्रावधानों को निरस्त करने का आग्रह करता है।

वही प्रस्ताव में कहा गया है कि CAA के जरिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन किया गया है। इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों और करार का भी उल्लंघन करता है।

जिसके तहत नस्ल, रंग, वंश या राष्ट्रीय या जातीय मूल के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। प्रस्ताव के मुताबकि यह कानून मानवाधिकार और राजनीतिक संधियों की भी अवहेलना करता है।

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