VIDEO: असम में CAA के ख़िलाफ़ फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू, बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट

दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ गुवाहाटी सहित प्रदेश भर में हुए प्रदर्शन पांच महीने के अंतराल के बाद एक बार फिर नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. राज्य के प्रमुख छात्र संगठन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के कार्यकर्ताओं ने 3 अगस्त को सड़कों पर मोटर साइकिल रैलियां निकाल कर नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।

आपको बता दें देश में कोरोना म’हामा’री के बढ़ते प्रकोप के बाद से असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी नागरिकता संशोधन क़ानून विरोधी रैलियों को रोक दिया गया था पांच महीने के अंतराल के बाद एक बार फिर नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

गौरतलब है की, बीते साल हुए नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के मामले में गिरफ़्तार हुए कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई गुवाहाटी जेल में कोरोना सं’क्र’मित पाए गए हैं. मंगलवार को केएमएसएस ने उनकी रिहाई और नागरिकता संशोधन क़ानून को वापस लेने के लिए पूरे असम में प्रदर्शन किया।

असम की राजधानी में केएमएसएस समर्थकों ने धारा-144 का उल्लंघन कर मानव श्रृंखला बनाई और नारेबाजी की तथा गोगोई की रिहाई और सीएए को वापस लेने की मांग की।

आंदोलनकारियों ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के आवास की ओर आगे जाने से पहले चौकीडिंगी से रैली शुरू की और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे तिंगखोंग के लिए आगे बढ़ने से पहले सभी मोटरसाइकिलें मुख्यमंत्री निवास के पास रुक गईं और आसू के सदस्यों ने सीएए के ख़िलाफ़ जमकर नारे वाजी की।

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि 1971 के बाद बांग्लादेश से आए हिंदू और अन्य गैर-मुसलिम अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने से असमिया और अन्य स्थानीय समुदायों की पहचान, संस्कृति और विरासत के लिए ख’तरा पैदा हो जाएगा।

वही दा वायर की खबर के अनुसार, कोरोना वायरस से सं’क्र’मित होने के बाद गोगोई का गुवाहाटी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में इलाज चल रहा है. वह गुवाहाटी जेल में कैद रहने के दौरान संक्रमित हो गए थे. गोगोई पिछले साल सीएए के विरोध में हिंसक प्रदर्शन करने के आरोप में जेल में हैं।

केएमएसएस अध्यक्ष राजू बोरा ने कहा कि समूह ने मंगलवार को सीएए के खिलाफ आंदोलन फिर से शुरू कर दिया है और कानून के वापस लिए जाने तक यह जारी रहेगा।

साभार: द वायर