चुनाव आयोग को लेकर पुण्य प्रसून बाजपेयी का बड़ा ख़ुलासा, कठपुतली बताते हुए किए कई ख़ुलासे

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपई ने एक कार्यक्रम के दौरान कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने देश के कई मुद्दों को लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधा. इसके साथ ही उन्होंने साल २०१२-१३ के बीच रामलीला मैदान और लाल किले पर हुए जनांदोलन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ऐसे मंच पहले जनता के मंच होने का दावा करते है लेकिन बाद में आपको किसी को वोट देने की वकालत करने लगते है. आज के समय में ज्यादातर विरोध और ऐसे प्रदर्शन सिर्फ चुनावी माहौल बनाने के लिए उपयोग किये जा रहे है.

इस दौरान उन्होंने कहा कि जब एमपी में वोटिंग चल रही थी तो उस समय दिल्ली में किसानों का आंदोलन चल रहा था. इस आंदोलन के मंच पर एनसीपी के नेता शरद यादव भी मौजूद थे जो खुद को किसानों का हितेषी बताकर सरकार पर निशाना साधा रहे है.

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लेकिन सवाल यह है कि जब वह खुद केंद्रीय कृषि मंत्री थे तब उन्होंने किसानों के लिए क्या किया था. मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि नागरिक मंचों को ऐसे लोकप्रिय चेहरों की जरूरत होती है जो बाजीगरी दिखा सके ऐसा ही एक चेहरा जनता ने 2014 में चुना था लेकिन क्या हुआ?

उन्होंने कहा कि जब भी कोई धर्म की बात करता है तो वह खुलकर नहीं बोल पता है. अगर देश में लोकतंत्र होता तो मुस्लिम अपनी बात खुल कर रखते है.

वाजपई ने कहा कि हमें लगता है कि देश का मुस्लिम समुदाय डरा हुआ है सहमा हुआ है सिमटा हुआ है और उसने मई 2019 तक ख़ामोशी बरतना तय कर लिया है इसका मतलब है वह मई 2019 तक भारत नागरिक नहीं है और अब तो दलित भी खोमोश हो गया तो अब तो वो भी देश का नागरिक नहीं है.

पूण्य प्रसून वाजपई ने कहा कि यह बीजेपी की सरकार नहीं है यह सिर्फ कुछ लोगों की सरकार है. सरकार के नाम पर कुछ ही चेहरे नजर आते है. सरकारी संस्थाएं सरकार के इशारों पर है. तेलंगाना में 70 लाख वोट नहीं पड़ सके लेकिन देश का चुनाव आयोग कहता है कोई बात नहीं अगली बार देख लेंगे मानों चुनाव आयोग मोदी के हाथ की ही कठपुतली हो.