राफेल तो अब आया, लेकिन इससे पहले भारत के इन फाइटर प्लेनों ने दुश्मनों को नेस्तोनाबूत किया, देखिए

राफेल ल’ड़ाकू विमानों की पहली खेप भारत पहुंच चुकी है. राफेल के आ जाने से भारतीय एयरफ़ोर्स की ताकत बढ़ गई है. ऐसा नहीं है कि भारतीय वायुसेना पर पहले से कोई फाइटर विमान नहीं था लेकिन वायुसेना पुराने पड़ते फाइटर जेट से परेशान थी पर अब राफेल के आने से उनकी दिक्कतें कम होंगी. भारत में फ्रांस से 58 हजार करोड़ रुपये में 36 रफाल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया है जिसमें से 5 आ चुके है.

विशेषकों का मानना है कि भारतीय वायुसेना की ताकत में राफेल के आ जाने से काफी इजाफा होगा. लेकिन राफेल से पहले वायुसेना के पास कौन-से लड़ाकू विमान थे? चलिए हम आपको बताते हैं-

मिराज 2000

एक मिराज 2000 लड़ा’कू विमान का निर्माण दसौ एविएशन करती है. एक विमान की कीमत करीब 230 करोड़ रुपये के आसपास है. इसे भारतीय वायुसेना में वज्र भी कहा जाता है. बता दें कि यह कंपनी राफेल फाइटर जेट भी बनाती है.

इसकी खासियत की बात करें तो इसकी अधिकतम स्पीड 2495 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह नौ तरह के अ’स्त्र ले जाने में सक्षम है. इसमें हाई फायरिंग रें’ज वाली दो 30 एमएम बंदूकें लगी हुई हैं. इसमें 60 किलोमीटर दूर तक निशाना साधने की दक्षता रखने वाली माइका मिसाइलें लगी हुई है यह 1000 किलो तक के लेजर गाइडेड बम गिरा सकता हैं.

मिराज 2000 ने 1999 में कारगिल की जंग में भारत की कामयाबी में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. इसके आलावा पुलवामा हम’ले के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक मिराज 2000 से ही की गई थी.

जैगुआर

जैगुआर की कीमत करीब 60 करोड़ रुपये थी. इसे SEPECAT नाम की कंपनी ने ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स और फ्रांस की एयरफोर्स के लिए बनाया था लेकिन बाद में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसे बनाने का लाइसेंस लेकर इसका निर्माण शमशेर नाम से किया. यह लंबी दूरी तक भारी बम ले जाने के लिए जाना जाता है. इसकी अधिकतम स्पीड 1350 किलोमीटर प्रतिघंटा है.

मिग 29 विमान

मिग 29 को वायुसेना में बाज कहा जाता है, इसे रूस के मिकोयान एविएशन साइंटिफिक इंडस्ट्रियल कॉम्प्लैक्स में बनाया गया. इसकी कीमत 300 करोड़ रुपये के आसपास थी. इस विमान की अधिकतम गति 2445 किलोमीटर है. मिग 29 बाकी मिग विमानों की तुलना में काफी कामयाब रहा है. यह अब भी सेवा में है और इससे 500-500 किलो के दो बम एक साथ गिराए जा सकते हैं.

मिग-29 ने कारगिल युद्ध में बखूबी अपने काम से कामयाबी के झड़े गाड़े थे. इन विमानों ने मिराज-2000 को सुरक्षा दी थी, सुखोई विमानों के बाद यह भारत की दूसरी डिफेंस लाइन है.

सुखोई SU-30MKI

सुखोई विमान की कीमत साल 2014 में 358 करोड़ रुपये के पास थी. इन्हें रूस की सुखोई कंपनी ने तैयार किया.  लेकिन बाद में उनका निर्माण भारत में हुआ. इसे वायुसेना में फ्लैंकर (किला) भी कहा जाता है. इसकी अधिकतम स्पीड 2500 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह फाइटर विमान हवा से हवा और हवा से जमीन में वा’र करने में सक्षम हैं.

तेजस

तेजस को भारत के पहले स्वदेशी ल’ड़ाकू विमान होने का गौरव प्राप्त है. इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाया था. एक तेजस मार्क 1 की कीमत 350 करोड़ रुपये है. तेजस का उपयोग लड़ा’ई में फ़िलहाल नहीं किया जाता है, वर्तमान ने यह मिग 21 वाली भूमिका में ही है. पहले इसका नाम लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जिसे तेजस नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया. यह 2016 में वायुसेना में शामिल हुआ था.

मिग 21 बाइसन

इसे रूस ने बनाया था इसकी कीमत साल 1974 में 14 करोड़ रुपये के करीब थी. इसकी खास बात यह है कि यह दुनिया का पहला सुपरसोनिक यानी ध्वनि की गति से भी तेज उड़ने वाला विमान है. इसे भारतीय वायुसेना की रीढ़ कहा जाता है. इसकी अधिकतम स्पीड 2230 किलोमीटर प्रतिघंटा है. हालांकि यह विमान क्रैश होने के चलते काफी बदनाम हुआ है.

मिग 27

मिग 27 को भारत ने रूस से खरीदा था. हालांकि बाद में लाइसेंस लेकर इस विमान को भारत में बनाना शुरू कर दिया था. इसे बहादुर भी कहा जाता था. इन विमानों की कीमत 16 करोड़ रुपये के आसपास हैं. इसकी अधिकतम स्पीड 1700 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर ह’मला करने में सक्षम है. यह लेजर गाइडेड बम भी गिराने में सक्षम था. अब यह रिटायर हो चूका है.

साभार- लल्लनटॉप