राफेल डील को लेकर CAG ने रिपोर्ट में किया बड़ा खुलासा

राफेल डील को लेकर CAG ने रिपोर्ट में किया बड़ा खुलासा

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राफेल विमान सौदे को लेकर काफी हंगामा मचा था. अब एक बार फिर से राफेल विमान सौदा सुर्ख़ियों माँ आ गया हैं. राफेल विमान सौदे को लेकर CAG ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है जिससे यह मामला एक बार फिर से विवादों में घिरता नजर आ रहा हैं. CAG ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि राफेल डील में अब तक टेक्नॉलजी ट्रांसफर ही नहीं की गई हैं.

कैग की रिपोर्ट में बताया गया हैं कि सितंबर 2015 को हुए 36 राफेल लड़ाकू विमान की डील के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत यह प्रस्ताव रखा गया था कि डीआरडीओ को हाई टेक्नॉलजी देकर वेंडर अपना 30 प्रतिशत ऑफसेट पूरा करेगा लेकिन टेक्नॉलजी ट्रांसफर अभी तक कन्फर्म नहीं हुआ है.

कैग में आगे कहा गया है कि साल 2005-2018 के दौरान रक्षा सौदों में कुल 46 ऑफसेट काट्रेक्ट किये जिसके कुल मूल्य 66427 करोड़ रुपये था. लेकिन दिसंबर 2018 तक इनमें से 19223 करोड़ के ऑफसेट कांट्रेक्ट ही पूरे हो सके हैं हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इसमें से भी 11396 करोड़ के क्लेम ही उपयुक्त पाए है जबकि बाकि को ख़ारिज कर दिया गया हैं.

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि अभी तक 55 हजार करोड़ रुपये के ऑफसेट कांट्रेक्ट को लेकर कोई काम नहीं हुआ है जबकि तय किये गए नियमों के तहत इन्हें साल 2024 तक पूरा किया जाना है.

कई तरीके से ऑफसेट प्रावधानों को पूरा किया जा सकता है. जैसे देश में रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ा कर, निशुल्क तकनीक उपलब्ध करा कर तथा भारतीय कंपनियों से उत्पाद बनाकर भी इसे हासिल किया जा सकता हैं. लेकिन कैग ने अपने ऑडिट रिपोर्ट में कहा है कि यह नीति अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पा रही हैं.

कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि खरीद नीति के तहत सालाना आधार पर ऑफसेट कांट्रेक्ट को पूरा करने का प्रावधान नहीं रखा गया हैं. पुराने मामले का बारीकी से विश्लेषण करने से पता चलता हैं कि आखिरी के दो सालों में ही ज्यादातर कांट्रेक्ट पूरे किए जाते हैं.

सीएजी ने रिपोर्ट में कहा है कि अपने ऑफसेट के प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में वेंडर अब तक पूरी तरह से नाकाम रहा हैं. रक्षा मंत्रालय को ऑफसेट नीति की दुबारा समीक्षा करने और इसे लागू करने की जरूरत हैं.

साभार- एनडीटीवी