कोंग्रेस में पूरी तरह ख़त्म होगा परिवारवाद, जो पहले से MLA या MP हैं अब…

लोकसभा चुनाव में अब गिने चुने दिन ही रह गए है ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी है. सभी राजनीतिक पार्टियां अपने उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करने में जुटी हुई है. पार्टियां लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए सही उम्मीदवार के चयन को अंतिम रूप देने में लगी हुई है. वहीं गठबंधन के साथ मैदान में आने वाली पार्टियां भी अपने सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने में लगे हुए है. इसी को देखते हुए देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी ने भी टिकट और गठबंधन को लेकर एक फ़ॉर्मूला तैयार कर लिया है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को लोकसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए सभी राज्यों के पार्टी इकाई के प्रमुखों के साथ दिल्ली में एक बैठक की. इस दौरान गठबंधन और टिकट को लेकर कांग्रेस ने एक नया फ़ॉर्मूला अपनाने का फैसला किया है.

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राहुल गांधी ने इस दौरान साफ कर दिया कि कांग्रेस वर्तमान राज्यसभा और लोकसभा सांसद, विधायक और उनके परिजनों को इस बार लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं देंगी. इसके आलावा उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों में गठबंधन को लेकर राज्य इकाई के सुझाव पर अमल किया जाएगा.

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस द्वारा शासित राज्यों के कई मंत्री अपने बेटों बेटियों या परिवार के किसी और सदस्य को टिकट दिलाने की होड़ में लगे हुए है. ऐसे समय में राहुल का यह बयान इन्हीं लोगों को कड़ा संदेश माना जा रहा है. लेकिन साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि कुछ बड़े नेताओं के परिजनों को टिकट देने का फैसला खुद राहुल गांधी करेंगे.

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खबर है कि मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ छिंदवाड़ा से अपने बेटे नकुल को टिकट दिलाने की कोशिशों में जुटे हुए है. आपको बता दें कि सीएम बनने से पहले कमलनाथ इसी सीट से कांग्रेस सांसद थे. वहीं सूत्रों का कहना है कि इस बैठक के दौरान कांग्रेस ने सभी राज्यों की इकाई से लोकसभा टिकट के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची मंगवाई है.