देशभर में भड़काऊ मीडिया के खिलाफ उठी आवाज, इन चैनलों को बैन करने की मांग

Coronavirus in India: आज दुनिया भर के 200 से भी ज्यादा देश कोरोना वायरस की म’हामा’री झेल रहे हैं. दुनिया भर में 13 लाख से भी ज्यादा लोग इस म’हामा’री का शिकार हो चुके हैं. तो वही दुनिया भर में 1,08,800 से अधिक लोगों की मौ’त हो चुकी है. हलाकि यह वक्त है जब सभी लोगों को मतभेदों भुलाकर एकजुट होकर मुस्तैदी से इस बीमारी से लड़ने की लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसके बहाने सा’म्प्रदा’यिकता को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।

कोरोना जैसी महामा’री के खिलाफ पूरा देश एकजुट होकर संघर्ष कर रहा है. देश का हर नागरिक सरकार द्वारा बताए गाइडलाइंस के मुताबिक नियमों का पालन कर रहा है लेकिन इस एकता को तोड़ने का प्रयास कुछ मीडिया वाले लगातार कर रहे हैं. आज देश के अधिकांश लोग न्यूज चैनलों और उनके पत्रकारों का नाम सामने आते ही भड़क उठते है क्योकि यही लोग देश के असल दुश्मन हैं।

आपको बता दें कोरोना वायरस को लेकर देशभर में जो हालात बने हुए हैं उसको लेकर मीडिया लगातार समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ रिपोर्टिंग कर रहा है. इसको लेकर देश भर के लोग नाराज हैं. वही दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित कार्यालय से 2000 से भी अधिक लोग मिलने के बाद निजामुद्दीन मरकज को लेकर जो रिपोर्टिंग हुई है उसे देश की जनता खासी नाराज नजर आ रही है।

मीडिया के खिलाफ ट्विटर पर भी अभियान शुरू हो गया है लोगों ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी है हलाकि यह पहली बार नहीं है जब न्यूज़ चैनलों पर बैन लगाने की मांग उठी हो इससे पहले भी कई बार ऐसा ही हुआ है. सबसे ज्यादा विरोध इस वक्त Zee News, सुधीर चौधरी, ABP News रुबिका लियाकत और सुदर्शन न्यूज़ सुरेश चौहान को लेकर हो रही है।

वही ट्विटर पर लगातार इन चैनलों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग कर रहे हैं साथ ही साथ इन पत्रकारों के लाइसेंस भी रद्द करने की मांग कर रहे हैं लोगों का आरोप है कि यह लोग सा’म्प्रदा’यिकता को बढ़ावा दे रहे।

भड़काऊ तरीके से रिपोर्टिंग कर लगातार एक समुदाय के खिलाफ गलत तरीके से खबरों को प्रसारित कर रहे हैं. हलाकि उत्तर प्रदेश पुलिस ने ऐसे कई चैनलों की खबरों को झूठा बता दिया है जिसके बाद से अब इन पर बैन लगाने की मांग उठ रही है।

गौरतलब है की इस मामले पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोप को खारिज कर दिया और ज़ी मीडिया को ख़बर डिलीट करने पर मजबूर कर दिया लेकिन दिन भर इन टेलीविजन पर नफरत फैला रहे एंकरों का क्या इलाज है?

वही समुदाय विशेष को आ’तं’की बताकर महा’मा’री के इस दौर में भी ज’हर उगलने वाले पत्रकारों का क्या इलाज है ? इन्हीं सवालों पर इस देश की सरकार को सोचना होगा और नि’ष्प’क्ष होते हुए तमाम भड़काऊ मीडिया चैनेलो पर कार्यवाही करनी होगी।

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