Valentine’s Day: लड़कियों के बारे में यह क्या बोल गए NDTV के रवीश कुमार, वायरल हो रही है पोस्ट

जिस समाज में प्यार करना मुश्किल हो जाए उस समाज में सबसे पहले नौजवान ही नहीं रहना चाहेंगे. रहेंगे भी तो मन मा#र कर. एक ज़िंदा ला#श बन कर.

भारतीय लड़कियों को मैं बिन माँगे एक राय देना चाहता हूँ. जब किसी को साथी चुनें सां’प्रदा’यिक ख़्याल वाले को न चुनें. जो दूसरों से नफ़रत करता है वो आपसे कभी प्रेम कर ही नहीं सकता. मुमकिन है आप अपनी पसंद से या माँ बाप की सहमति से शादी करें लेकिन ऐसे लड़के का साथ न चुनें. सां’प्रदा’यिक ख़्याल के लोग पोलिटिकल स्पेस में ही नहीं बल्कि पर्सनल स्पेस में भी दं#गा’ई होते हैं.

वह कभी भी ईमानदार प्रेमी नहीं हो सकता है. वह आपके साथ भी हिं#सा करेगा. इसका मतलब यह नहीं कि लड़कियाँ सां’प्रदायि’क नहीं होती हैं. तब लड़कों को ऐसी लड़कियों से सतर्क रहना चाहिए. अंत में राजनीति भी तभी बेहतर करती है जब वह प्रेम की बात करती है. जिस समाज में प्रेम करना मुश्किल हो जाए उस समाज में सबसे पहले नौजवान ही नहीं रहना चाहेंगे.

प्यार करना गुलाब देना नहीं होता

प्यार करने के कितने लाभ हैं. जब आप प्यार में होते हैं तो किसी के लिए बेहतर होते हैं. किसी के लिए सं’वरते हैं. और किसी के लिए दुनिया से लड़ने का साहस करते हैं. प्रेम से नफ़रत करने वाले हमेशा होंगे. मोहब्बत करने वाले हमेशा होंगे. मुझे पता है कमेंट में गा#ली देने आएँगे.

ऐसे लोगों को जीवन में किसी का प्यार नहीं मिलता है. ऐसे लोगों को उसका भी प्यार नहीं मिलता जिसके लिए ये दूसरों को गा’लि’याँ देते हैं. ऐसे लोग भी किसी को चाहते हैं मगर चाह नहीं पाते.

प्यार का कोई दिन नहीं हो सकता और अगर कोई दिन है भी तो उसमें भी कोई बुराई नहीं. आज मौसम भी अच्छा है. खुद को अच्छा प्रेमी बनाएँ. बात करने का सलीक़ा सीखें. थोड़ा मीठा बोलें. बोलने में अंदाज़ लाएँ. साथ जीवन का तरीक़ा भी. मिल बाँट कर काम करने का हुनर भी. प्यार करना गुलाब देना नहीं होता, बल्कि काँ#टों के बीच गुलाब की तरह खिल जाना होता है.

पुणे (महाराष्ट्र) की रहने वाली 'बुशरा त्यागी' पिछले 5 वर्षों से एक Freelancer न्यूज़ लेखक (Writer) के तौर पर कार्य कर रही हैं। 16 साल की उम्र से ही इन्होंने शायरी, कहानियाँ, कविताएँ और आर्टिकल लिखना शुरू कर दिया था।