आर्थिक तंगी से जूझ रही मोदी सरकार लगा एक और तगड़ा झटका, नोट छापने से RBI ने किया इनकार

केंद्र की मोदी सरकार का दुसरे कार्यकाल का दूसरा आम बजट 1 फरबरी यानी शनिबार को पेश किया गया. बित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने यह बजट पेश किया. सरकार के द्वारा इस बजट में राजकोषीय घाटा(fiscal deficit) चालू बित्त बर्ष में 3.8 फीसदी रहने का अनुमान बताया गया है. इस राजकोषीय घाटे का असर बही पड़ेगा जहां लोगों की कमाई के मुकाबले खर्च बढने पर होता है. बता दें आरबीआई ने महंगाई और राजकोषीय घाटे के आंकड़े को देखते हुए लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।

भारतीय रिज़र्व बैंक से इस घाटे को देखते हुए अतिरिक्त नोट छापने से इंकार कर दिया है। लेकिन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिमोहन्दास ने बुधबार को कहा की राजकोषीय घाटे को लेकर अतिरिक्त नोट छापने के लिए केंद्रीय बैंक की कोई योजना नहीं है। इससे मोदी सरकार को बहुत बड़ा झटका लगा है. यह तीसरा साल है जहां सरकार ने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को लगातार संसोधित किया है।

बजट 2020 में राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है जबकि पिछले बजट में इसके 3.3 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी. वहीं अगले वित्त वर्ष 2020-21 के लिये राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि जुलाई 2019 में इसके 3 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी।

सरकार का राजकोषीय घाटा दिसंबर अंत में 132 प्रतिशत को पार कर गया है। इसके आलावा RBI के गवर्नर शक्तिकांतदास ने केंद्र सरकार को सुझाब देते हुए यह भी कहा है की कोरोना वायरस के बढते प्रवाभो को देखते हुए उसके आर्थिक प्रभाबों से निपटने के लिए आकस्मिक योजना तैयार करके रखनी चाहीए।

रिज़र्व बैंक ने यह भी कहा है की दुनियाभर मे कोरोना वायरस के फैलने से विभिन्न देशों के व्यपार,पर्यटन, परिवहन. इसके आलावा शेयर मार्केट पर भी इसका असर देखने को मलेगा।

बता दें बढ़ते राजकोषीय घाटे का असर वही होगा जो आपकी कमाई के मुकाबले खर्च बढ़ने पर होता है. खर्च बढ़ने की स्थिति में सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। इस घाटे को कम करने के लिए सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से उम्‍मीद कर रही थी।

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