सफूरा जरगर के समर्थन में आया अमेरिका बार एसोसिएशन, कहा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप नहीं…

देश की राजधानी दिल्ली में साल की शुरुआत में भड़’की हिं’सा के आरोप में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की छात्रा सफूरा ज़रगर को गिरफ्तार कर लिया गया था. इसके बाद से ही बीते 3 महीने से ही गर्भवती सफुरा जरगर तिहाड़ जेल में बंद हैं. अब उनकी गिरफ्तारी को लेकर सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स, अमेरिकन बार एसोसिएशन ने बड़ा बयान दिया हैं, साथ ही सफूरा की रिहाई की मांग भी की हैं.

सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स, अमेरिकन बार एसोसिएशन ने सफुरा जरगर की पूर्व परीक्षण हिरासत को अन्तर्राष्ट्रीय कानून मानकों का खुला उलंघन बताया हैं. इसके साथ ही उनकी जल्द से जल्द रिहा करने की अपील भारत सरकार से की हैं.

लाइव लॉ डॉट इन की एक रिपोर्ट्स के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय कानून जिनमें भारत भी एक पार्टनर के तौर पर शामिल हैं और उनके पालन के लिए बाध्य हैं. अन्तर्राष्ट्रीय कानून संधि सहित सिर्फ जिन परिस्थितियों में पूर्व परीक्षण हिरासत की अनुमति दी जाती हैं वह जामिया छात्रा सफुरा ज़रगर मामले में नहीं दी गई.

अमेरिकन बार एसोसिएशन ने कहा कि सफुरा जरगर को तिहाड़ जेल में रखा गया है, जहां क्षमता से अधिक केदी है और जेल के सहायक अधीक्षक ने COVID-19 के लिए पॉजिटिव टेस्ट भी किया है हालांकि कुछ कैदियों को छोड़ दिया गया है.

एक इंटरव्यू के दौरान सफुरा जरगर की बहन ने कहा है कि उन्हें पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम है जिसमें से एक स्वास्थ्य प्रभाव हाई ब्लड प्रेशर के मरीज कोविड-19 के जल्द संक्र’मण के जोखिम बलि आबादी में से एक हैं.

उनके आपराधिक आचरण को साबित करने के लिए कोई सबूत ना होना, उनकी गर्भवती स्थिति और खास तौर पर अभियोजकों की विफलता के स्पष्ट प्रमाणों की कमी तो सफूरा ज़रगर को जमानत दिए जाने पर कैसा खतरा हैं?

सफुरा जरगर को जमानत बांड पेश करने और अपने परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाना चाहिए. सफूरा के मामले को लेकर मानवाधिकार केंद्र ने कोर्ट से आग्रह किया है कि भारत की नैतिक और कानूनी बाध्यताओं को बरकरार रखते हुए और देश में फ़ैल रही महामारी को देखते हुए सफूरा की तत्काल रिहाई के आदेश दिए जाए.

वहीं 10 अप्रैल से हिरासत में ली गई जरगर को लेकर सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स अमेरिकन बार एसोसिएशन ने कहा कि सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (ICCPR) पर अंतर्राष्ट्रीय करार कहता है कि यह सामान्य नियम नहीं होना चाहिए कि मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे व्यक्तियों को इस तरह हिरासत में रखा जाए.

साभार- हिंदी सियासत