#Breaking: जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की छात्रा सफुरा जरगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत

दिल्ली में हुए दं#गों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ़्तार की गई जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा सफ़ूरा ज़रगर कई महीनों से जेल में बंद थी जिन्हें आखिरकार दिल्ली हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सफूरा की जमानत का मानवीय आधार पर विरोध नहीं किया जिसके चलते अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी है. आपको बता दें कि सफूरा ज़रगर छह महीने की गर्भवती हैं.

फरवरी में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी ज़िले में दं#गे हो गए थे इस दौरान सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 53 लोग मा#रे गए थे. इस दं#गे में म’र’ने वालों में ज़्यादातर मुसलमान थे. यह दं#गे जब हुए थे तब दिल्ली के शाहीन बाग़ और अन्य जगहों पर सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किये जा रहे थे.

दिल्ली में हुए इस हं’गा’मे के बाद दिल्ली पुलिस ने कई छात्र-छात्राओं को अप्रैल महीने में उन लोगों पर दं#गों की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए उन्हें हि’रा’सत में ले लिया था. वहीं गिरफ्तार किये गए अधिकतर छात्र-छात्राएं वहीं थे जिन्होंने दिसंबर से दिल्ली में शुरू हुए सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भाग लिया था.

जामिया में भी सीएए का विरोध किया गया था इसके लिए बनाए गए संगठन जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी में सफ़ूरा ज़रगर बतौर सदस्य शामिल थी. सफूरा ने सीएए के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद की थी जिसके बाद वह सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रही थी.

दिल्ली पुलिस ने सफ़ूरा ज़रगर को 10 अप्रैल को गिरफ़्तार कर लिया था. बीबीसी के अनुसार सफूरा को दिल्ली पुलिस 10 अप्रैल, शुक्रवार को दोपहर तीन बजे पूछताछ के लिए उनके घर से लोधी कॉलोनी पुलिस थाने लेकर आई थी और देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

सफूरा की गिरफ्तारी शुक्रवार को की गई थी जिसके अगले दो दिनों तक सप्ताहांत के कारण कोर्ट कार्रवाई नहीं हो सकी थी इसलिए उन्हें मैजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया. सफूरा की गिरफ्तारी जाफ़राबाद थाने में 24 फ़रवरी को दर्ज एक एफ़आईआर के तहत हुई थी जो जामिया के कैंपस से लगभग 20 किलोमीटर दूर है.

इस मामले में उन्हें 13 अप्रैल को मजिस्ट्रेट ने ज़मानत दे दी थी लेकिन इसके बाद उन्हें रिहा करने की बजाय 6 मार्च को की गई एक दूसरी एफ़आईआर के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया और साथ ही उन पर यूएपीए लगा दिया गया था. इस मामले में 21 मार्च को उनकी जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी गई थी.

जिसके बाद ज़रगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में गर्भवती होने के आधार पर ज़मानत यचिका दायर की थी. जिसके बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा था. पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में सफ़ूरा की ज़मानत का विरोध किया था.

इसके साथ ही पुलिस ने दलील थी कि इससे पहले भी तिहाड़ जेल में रहते हुए कई क़ै’दि’यों की डि’लीवरी हो चुकी है इसलिए इसे आधार बनाकर सफ़ूरा को ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए. लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जाहिर नहीं की जिसके बाद सफूरा को सशर्त कोर्ट ने ज़मानत दे दी हैं.