राम मंदिर ट्रस्ट: मोदी सरकार के फैसले से आग बबूला हुए अयोध्या के साधू-संत, वही मुस्लिम खेमा भी नाराज

नई दिल्लीः अयोध्या (Ayodhya) मोदी सरकार द्वारा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद अयोध्या के संत समाज बागी हो गए है। अब इस मामले में अयोध्या के संतों ने गुरुवार शाम तीन बजे आपात बैठक बुलाई है। यह बैठक महंत नृत्य गोपाल दास की आवास मणिराम राम दास छावनी में होनी है. बताया जा रहा है की महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में अयोध्या के संत आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।

गौरतलब है की राम मंदिर निर्माण के लिए बने श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष हिन्दू पक्ष की वकालत करने वाले वरिष्ठ वकील के परासरन को बनाया गया है। लेकिन इस फैसले से अयोध्या के साधु-संत भड़क उठे है। उनका आरोप है कि ट्र्स्ट में पुराने लोगों को जगह न देकर इन नए लोगो को कैसे जगह दी जा सकती है।

अगर जरुरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे

वही साधु-संतो ने कहा की मोदी सरकार ने पुराने लोगों के साथ अन्याय किया गया है और इसलिए वे लोग इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास ने संतों की एक आपात बैठक बुलाई है। उनका कहना है की सरकार ने संतों का अपमान किया है। हमने एक बैठक बुलाई है जिसमें सभी संत शामिल होंगे।

महंत सुरेश दास ने यह भी कहा की अगर जरुरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। सीएम योगी ने खुद नृत्य गोपाल दास को शामिल करने की बात कही थी, लेकिन उन्हें भी शामिल नहीं किया। वहीं सरकार द्वारा दूर दराज में जमीन मिलने की वजह से मुस्लिम पक्ष भी नाराज है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर अयोध्या की सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में लखनऊ राजमार्ग के पास जमीन देने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटन पत्र दिया है।

वक्फ बोर्ड को जमीन देने का निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया। लेकिन इस फैसले मुस्लिम पक्ष नाराज हैं। उनका कहना है कि यह जमीन काफी दूर दी गई है।