हिन्दुओं ने लगाई टोपी, तो मुस्लिमो ने पढ़े मंत्र, महिलाओं ने पहनी साड़ी, बोले अब पहचानो कपड़ों से लोगों को

दिल्ली का शाहीनबाग़ सारे देश का ध्यान पिछले करीब 2 महीने से अपनी ओर खीचें हुये है शाहीनबाग़ में हजारों लोग नागरिकता संशोधन विधेयक(CAA) का विरोध कर रहे है उनका कहना है कि जब तक सरकार इसे वापस नहीं लेगी तब तक ये प्रदर्शन इसी तरह चलता रहेगा. गुरूवार के दिन शहीनबाग़ में एक अलग ही नजारा देखने को मिला जिसमे सभी धर्मों के लोगों ने एक दुसरे के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया.

शाहीन बाग़ में लोगों ने एक दूसरे के धर्म और उनकी धार्मिक संस्कृति को अंदर से जाना ,साथ ही सरकार को ये भी संदेश दिया कि शाहीनबाग़ में बेठे लोग किसी एक धर्मं के लोग नहीं है इसका विरोध सभी धर्म के लोग कर रहे है.

Delhi Hindu Muslim Ekta

कपड़ों से नहीं पहचाने जा सकते हिदुस्तानी, मात खा जाओगे तुम

दरअसल पीएम नरेन्द्र मोदी ने कुछ दिन पहले एक चुनावी रैली में कहा था कि दं’गाइयों को उनके कपड़ों से पहचाना जा सकता है.

इधर शाहीन बाग़ में सीएए और एनआरसी के खिलाफ जो आंदोलन कर रहे लोगों ने आपस में कपडे बदलकर मानो ऐसा सन्देश दिया है कि कपड़ों से लोगों को नहीं पहचाना जा सकता.

आपको बता दें यहाँ, फ़ातिमा मंत्रोच्चारण कर रहीं थीं, तो पंडित जी टोपी लगाकर बैठे हुए थे. अल्लाहुअकबर और मंत्रो के उच्चारण से शाहीन बाग़ आज गूँज उठा.

Shaheen Baag me Hindu muslim ekta dekho

उसमें कपड़े देखकर पहचाना जा सकता है कि ये आंदोलनकारी कौन हैं. पीएम ने ये टिप्पणी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए की थी लेकिन इसे अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम तबके पर कमेंट माना गया.

जिसके बाद शहीनबाग़ बेठे प्रदर्शन कारियों ने इसका विरोध बड़े ही रोचक तरीके से किया जिसे केंद्र सरकार को एक करारा जबाब माना जा रहा है.

शाहीन बाग़ की एकता ने जड़ें हिला दीं साम्प्रदायिकता की

गुरूवार को सभी धर्मों के लोगों ने अपने अपने धर्म के हिसाब से पूजा पाठ और प्रार्थना की जिसमे एक तरफ शगुफ्ता ने पूजा-पाठ के साथ जहां मंत्र का जाप किया तो वहीं उपासना और शिवानी ने कलमा पढ़ा.

इसी के साथ अन्य धर्मों के लोगों (सिख, इसाई, बोद्ध) ने भी एक दुसरे के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. ख़ास बात तो ये रही कि लोगों ने दूसरे समुदायों के पहनावे बदले.

मुस्लिम महिलायें साड़ी पहनकर आयीं, तो हिन्दुओं ने भी टोपी पहनी. इस प्रदर्शन की खास बात यह रही की महिलाओं ने इसमें बड़चढ़ कर हिस्सा लिया. जिसमे मुस्लिम महिलाओं ने साड़ी पहनकर विरोध जताया तो हिन्दुओं ने टोपी पहनी तो कुछ ने पगड़ी भी बाँधी.

इस सारे प्रदर्शन को जश्न-ए-एकता का नाम दिया गया और विरोध में बैठीं महिलाओं का कहना था कि देख लो मोदी और अमित शाह हम हिन्दुस्तानी है हमें कपड़ों से पहचानने और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश न करें.