सीमा पर बने तनाव के बीच केंद्र सरकार ने चीनी कंपनी को दिया दिल्ली-मेरठ सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का कितने रूपये का ठेका

एक तरफ भारत और चीन की सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई हैं. दोनों देशों की सेना के बीच झड़प की खबरें भी सामने आ रही हैं. इसके अलावा देश भर में चीनी माल के बहिष्कार के लिए सोशल मीडिया पर कई अभियान भी चलाए जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ केंद्र की बीजेपी सरकार भारत में काम करने के कई बड़े ठेके चीनी कंपनियों को दे रही हैं. इसी क्रम में केंद्र सरकार ने दिल्ली-मेरठ सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का ठेका एक चीनी कंपनी को दे दिया हैं.

केंद्र सरकार ने दिल्ली-मेरठ ​रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने का ठेका चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को दिया हैं. जब देश में चीन के खिलाफ माहौल बना हुआ हैं ऐसे में एक चीनी कंपनी को करीब 1100 करोड़ रुपये का ठेका देने पर सोशल मीडिया समेत विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है.

वहीं इसी को लेकर आरएसएस से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने भी नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की हैं. दरअसल चीनी कंपनी ने सबसे कम बोली लगाई थी जिसके बाद उसने यह ठेका हासिल कर लिया. इसीलिए स्वदेशी जागरण मंच ने पीएम मोदी से इस बोली को रद्द करने की मांग की है.

स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार से मांग करते हुए कहा है कि चीनी कंपनी के इस ठेके को तुरंत रद्द करते हुए इसे किसी भारतीय कंपनी को दिया जाए. मंच ने कहा कि एक तरफ सरकार देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात कर रही हैं अगर वह सच में ऐसा चाहती हैं तो ऐसी बड़ी और  महत्वपूर्ण परियोजनाओं में चीनी कंपनियों के शामिल होने पर बैन लगाए.

आपको बता दें कि इन दिनों भारत-चीन सीमा को लेकर लद्दाख में काफी तनाव बना हुआ हैं. खबरों के अनुसार सीमा पर हाल ही में चीनी सेना और भारतीय सेना के बीच हिं’सक झड़प हो गई थी जिसमें सेना के एक अधिकारी और दो जवान शहीद हो गए. ऐसे समय में यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया हैं.

सोशल मीडिया यूजर किसी चीनी कंपनी को ठेका मिलने से नाराज है और मोदी सरकार के इस फैसले पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं. बता दें कि इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर के अंतर्गत न्यू अशोक नगर से साहिबाबाद के बीच 5.6 किमी तक अंडरग्राउंड सेक्शन का निर्माण किया जाना हैं.