CAG रिपोर्ट बताती है, सियाचिन में जवानों को है रोटी, कपड़ा और आवास नहीं, और इधर जवानों के नाम पर वोट मांगे जा रहे है

दुनिया के सबसे मुश्किल सरहदी इलाकों में से एक सियाचिन, जहां बिना जरुरी उपकरण के सांस लेना भी मुश्किल होता है ऐसी विकट परिस्थितियों में भी वहां भारतीय जवान बहादुरी से डटे रहते है लेकिन उन जवानों को भी रोटी, कपड़ा जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है यह कहना है भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी (CAG) का।

सोमवार 3 फरवरी को (CAG) द्वारा यह रिपोर्ट देश के संसद में पेश की गई साल 2017-2018 के आंकड़े बताते है की यह रिपोर्ट भारतीय जवानो 9000 फीट की ऊचाई पर होने वाली रोजमर्रा की जरुरी चीजों की कमी को उजागर करती है। जवानों को 9000 फीट की ऊचाई और -40 डिग्री के तापमान में खुद को हमेशा चुस्त -दुरुस्त रखने के लिए विशेष खाने की जरुरत होती है।

जवानों को विशेष कपड़ों,जूतों और जेकेट की भी है कमी

लेकिन (CAG) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में जवानों को जरुरत के हिसाब से विशेष खाने की भी कमी दिखाई गई है और साथ ही विशेष खाने के बदले दिया जाने वाला सब्स्टीट्यूट भी जवानों को नहीं मिला जिसकी बजह से कई बार जवानों को 82 परसेंट तक केलोरी कम मिली है।

इतनी ऊचाई और -40 डिग्री के तापमान में जवानो को खुद को सुरक्षित रखने के लिए सभी प्रकार के विशेष उपकरणों की जरुरत होती है रिपोर्ट बताती है कि 2015 से लेकर सितंबर, 2016 तक जवानों को जूता नहीं दिया गया,जिसकी बजह से जवानों को पुराने जूतों को ही रिसायकल करके पहनना पड़ा।

सेनिकों के स्वास्थय भी रहा प्रभावित

खाने, कपड़ों और आवास में कमी की बजह से सेनिकों का स्वास्थय भी प्रभावित रहा है फेस मास्क,स्लीपिंग बैग भी पुराने स्पेसिफिकेशन के खरीद लिए गए जिससे सैनिक बेहतर प्रॉडक्ट का इस्तेमाल करने से वंचित रहे। खरीद प्रक्रियाओं में देरी की वजह से सैनिकों का हेल्थ और हाइजीन भी प्रभावित हुआ।

डिफेंस लैब में रिसर्च और डेवेलपमेंट की कमी और स्वदेशीकरण में विफलता की वजह से सामान आयात करने पर ही निर्भरता रही।आयात में देरी कि बजह से जवानों को समय पर उपकरण उपलब्ध नहीं हो पाए।

स्नो ग्लासेज एक तरह का विशेष चस्मा होता है जो की बर्फ से टकराकर आने वाली सूरज की किरणों से आँखों की रक्षा करता है ये किरणे इतनी खतरनाक होती है कि इससे अंधे होने का भी खतरा रहता है |रिपोर्ट के अनुसार जवानो को इसकी भी कमी रही।

सरकार इस मुद्दे पर बचाव की स्तिथि में ही नजर आई है जवानो को होने वाली कमी को लेकर सरकार ने मार्च 2019 में ही सदन में सफाई दी थी, साथ ही रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस कमी को जल्द ही दूर किया जाएगा।

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