भारत में मुसलमानों की स्थिति पर आई इंटरनेशनल माइनॉरिटी की रिपोर्ट, 2014 के बाद ऐसे हुए हालात

अंतरराष्‍ट्रीय रिपोर्ट में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर का मामला बताता है, कि औपचारिक लोकतांत्रिक ढां'चे के भीतर नागरिकों के लिए स्पेस को पूरी तरह से कैसे मिटाया जा सकता है.

देश में लगातार अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति चिंता व्यक्त की जाती है और सरकार भी इसको लेकर प्रयासरत रहती है कि अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा की जा सके लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है. जिसमें यह कहा गया है कि भारत में अब मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए रहना खत’रे के दायरे में है।

दरअसल, मुस्लिम अल्पसंख्यकों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए ‘साउथ एशिया स्टेट ऑफ माइनॉरिटी’ ने एक रिपोर्ट जारी की है। 2020 में जारी की गई इस रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि- भारतीय जनता पार्टी द्वारा जब से नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित किया गया है तब से हमारा देश “मुस्लिम-अल्पसंख्यकों” के लिए खतरनाक और हिंसक स्थान बन चुका है।

भारत में अल्पसंख्यकों के लिए जताई चिंता

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दिसंबर 2019 में जो सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) कानून पारित किया गया था जो कि मुस्लिम लोगों को कानून के दायरे में शामिल नहीं करता है। इसको लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खूब आंदोलन भी किये थे जिसमें शाहीन बाग आंदोलन काफी चर्चा में रहा था। सरकार ने कानून लागू करने के साथ ही एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) लाने इशारा भी किया था, जो कि कई मुसलमानों को राष्ट्र से निष्कासित कर देगा।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहां संपूर्ण विश्व में नागरिक अधिकारों को खत’रा है वहीं भारत में कुछ एक सालों में जो परिवर्तन हुआ है वह खतरे का संकेत है, जो कि असामान्य गति से हुए हैं। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि- भारत मुसलमानों के लिए खत’रना’क और हिं स’क जगह हो गया है।

इस रिपोर्ट के अंतर्गत पिछले वर्ष ‘जम्मू और कश्मीर’ में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया गया है। जब केंद्र सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत राज्य के विशेष दर्जे को निरस्त कर दिया था। दक्षिण एशिया में, नागरिक समाज को लगातार विवश किया जा रहा है। इसका एक कारण लोकतांत्रिक विकास में देरी भी हो सकता है जिससे इसे मजबूत चुनौतियों का सामना कर रहा है।

नेपाल भूटान अफगानिस्तान बांग्लादेश पाकिस्तान और श्रीलंका के नागरिकों की निजी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आकलन के आधार पर यह रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि- पूरी दुनिया में नागरिक अधिकारों पर खत’रा मंड’रा रहा है। लेकिन भारत, मुसलमानों के लिए भ याव’ह और हिं#सा युक्त स्थान बनता जा रहा है।