बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: सरकार की लापरवाही को देखते हुए जापान ने साफ़ कह दिया हैं देरी हुई तो हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी की केंद्र सरकार को देश में होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले एक और झटका लगा गया है. पीएम मोदी की महत्वकांक्षी योजना बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को जापान ने झटका दे दिया है. दरअसल जापान ने मुंबई-अहमदाबाद की बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया पर चिंता जाहिर की है. उसका कहना है कि 2022 तक अगर यह परियोजना पूरी नहीं होती है तो इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं होंगे.

सोमवार को मुंबई में जापान के काउंसल जनरल रयोजी नोडा ने भूमि अधिग्रहण को लेकर कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि परियोजना शुरू होने की दिसंबर 2018 की डेडलाइन पहले ही मिस हो चुकी है. ऐसे में अगर 2022 तक परियोजना का काम खत्म नहीं होता है तो इसके लिए वह कुछ नहीं कर सकते हैं.

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उन्होंने कहा कि वह गुजरात और महाराष्ट्र सरकार की पहल का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक दोनों सरकारों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कोई तेजी नहीं दिखाई हैं. इसके चलते परियोजना में देरी होने की संभावना बनी हुई है. एक रिपोर्ट के अनुसार इस प्रकिया में जून 2019 तक का समय लग सकता है.

आपको बता दें कि नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को राज्य सरकारों के साथ मिलकर गुजरात में 612 हेक्टेयर, दादरा और नागर हवेली में 7.5 हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 246 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करनी है और इसके लिए गुजरात में 5404 लोगों को अपनी जमीन देनी होगी.

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इसमें सबसे अधिक 1196 लोग सिर्फ अहमदाबाद के रहने वाले है. इसके बाद खेड़ा में 783 लोग अपनी जमीन देंगे. परियोजना पर गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने 19 फरवरी को विधानसभा में कहा था कि अधिग्रहण के लिए 32 तालुका के 197 गांवों की जमीन का चुनाव किया गया है. अब तक किसानों की सहमति से 160 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है और इसके लिए किसानों को 620 करोड़ का मुआवजा भी दिया जा चुका है.