हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने वाला सुदर्शन न्यूज़ का चीफ एडिटर ‘सुरेश चव्हाणके’ जायेगा जेल?

सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके शुक्रवार को एक शो करने जा रहे हैं, इसे लेकर उन्होंने एक ट्वीट करके जानकारी दी. लेकिन उनका यह शो विवादों में फं’सता नजर आ रहे हैं. मामला इतना बढ़ गया हैं कि लोग उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे है. दरअसल सुरेश ने अपने ट्वीट में एक वीडियो पोस्ट किया हैं जिसमें वो नफरत फ़ैलाने वाले शब्दों का इस्लेमाल करते नजर आ रहे हैं. सुरेश ने सिविल सेवाओं की चयन प्रक्रिया पर सवालियां निशान लगाया हैं.

सुरेश चव्हाणके के खिलाफ आईपीएस एसोसिएशन और कई सिविल सेवा अधिकारी गुरुवार को एकजुट होकर आवाज़ उठाते नजर आए. चव्हाणके ने सिविल सेवाओं में मुसलमानों की कथित घु’सपैठ की बात कहते हुए इसे नौकरशाही जि’हा’द बताया हैं. साथी ही दावा किया हैं कि वो इस पर शुक्रवार को अपने कार्यक्रम में बड़ा खुलासा करेंगे.

शुक्रवार को प्रसारित होने वाले शो के इस अंश पर अधिकारियों ने अप्पति जाहिर करते हुए चव्हाणके के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई हैं. आईएएस और आईपीएस अधिकारीयों का कहना हैं कि सिविल सेवा अधिकारियों का चयन करने वाली सिविल सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर यह घृणास्पद भाषण सवाल उठाता है.

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के केंद्रीय समूह आईपीएस एसोसिएशन ने एक ट्वीट करके इसे गैर जिम्मेदाराना पत्रकारिता और सां’प्रदा’यि’क करार देते हुए इसकी काफी निंदा की हैं.

चव्हाणके ने बुधवार को एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें उसने सिविल सेवाओं में मुसलमानों की घु’सपै’ठ को लेकर सवाल उठाए. वीडियो में चव्हाणके कई सवाल करते नजर आते हैं. वो पूछते हैं कि मुसलमान आईएएस, आईपीएस में अचानक कैसे बढ़ गए? सोचिये अगर जामिया के जि’हा’दी आपके जिलाधिकारी हो और हर मंत्रालय में सचिव बन गए तो क्या होगा?

सोशल मीडिया पर चव्हाणके का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं और यूजर्स इसका विरो’ध करते हुए सस्पेंड सुरेश चव्हाणके जैसे हैशटैग ट्रेंड करते हुए उनका ट्विटर अकाउंट सस्पेंड करने की मांग ट्वीटर से कर रहे हैं.

वहीं इसे लेकर कई आईपीएस अधिकारी भी विरोध जता रहे हैं. सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एन.सी. अस्थाना ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं में अधिकारियों के चयन पर यूपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था पर अखंडता और निष्पक्षता के संदेह जता कर वो संवैधानिक योजना के प्रति लोगों में अविश्वास जन्म दे रहे हैं.

वहीं इसे घृणा फैलाने वाली कोशिश बताते हुए आईपीएस अधिकारी निहारिका भ’ट्ट ने कहा कि धर्म के आधार पर अधिकारियों की साख पर सवाल उठाना ना सिर्फ हा’स्यपू’र्ण है बल्कि इससे कड़े कानूनी प्रावधानों के जरिए निपटा जाना जरुरी हैं. हम सभी सबसे पहले भारतीय हैं.

वहीं चेन्नई में आईजी पद पर कार्यरत आईपीएस अधिकारी नजमुल होदा ने इसे हेट स्पीच करार दिया. दिप्रिंट से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर हेट स्पीच हैं. इस तरह के बयान और रिपोर्ट एक समुदाय को डी-ह्यू’मना’इज करने का प्रयास हैं.

साभार- दिप्रिंट