जाहिल मीडिया का नंगापन

बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात मामले को लेकर देश और विदेश के कई लोगों पर दायर की गई FIR को ख़ारिज कर दिया हैं. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया गया हैं. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इसे मीडिया का प्रॉपेगेंडा करार दिया हैं. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. ऐसे ही एक सोशल एक्टिविस्ट ने एक लेख के द्वारा मीडिया के कामकाज पर सवाल उठाए.

मीडिया का नंगापन

मौलानाओं ने बिरियानी माँगा, इस खबर का सूत्र कौन था? मौलानाओं ने अर्धन’ग्न होकर नर्सों को घूरा, इस खबर का सूत्र कौन था? मौलानाओं ने थूका, इस खबर का सूत्र कौन था? मौलानाओं ने नर्सों के सामने पेशाब किया, यह करते हुए अंजना ने देखा या रूबिका ने? सुधीर ने देखा या दीपक ने?

मेरी समझ में नहीं आता कि अपने घर में बहन बेटी रखने वाले यह पत्रकार किस मुँह से किसी पर झूठा आरोप लगाकर उनका चरित्रहनन करते हैं और फिर अपनी बहन बेटी का सामना करते हैं? अंजना ओम कश्यप की 18 साल की बेटी है, वह बाम्बे उच्चन्यायालय के फैसले के बाद अपनी माँ अंजना ओम कश्यप के बारे में क्या सोच रही होगी?

यदि सभी ऐंकर और पत्रकार नपुंशक नहीं होंगे, उनकी पत्नियाँ बाँझ नहीं होंगी तो सभी के औलादें होंगी. यह 24×7 झूठ परोसकर अपनी इन औलादों का सामना करते कैसे होंगे? बांबे उच्चन्यायालय ने जब इन ऐंकरों और पत्रकारों को उनके स्टूडियो और न्यूज रूम में ही नं’गा कर दिया है तब सवाल तो उठेगा कि मरकज और तबलीगी ज़मात पर हुए उस आक्र’मण का हरजाना कौन भरेगा?

विदेश से जमात में आए मौलानाओं को अपराधी बनाकर जेल में ठूसा गया, उनके चरित्र पर वि’भत्स आक्र’मण किए गये. आप तब के पूरे 1 महीना चले हंगामे में टीवी चैनलों के पैनल डिस्कशन और मीडिया हेडिंग देखिए, बांबे हाईकोर्ट के फैसले के बाद शायद अब सबको शर्म और घिन आए.

पर देश उसका दुष्परिणाम भुगत रहा है

जब देश को कोरोना से लड़’ने के तौर तरीकों पर बहस करने की ज़रूरत थी तब मीडिया मौलानाओं की नं’गी टांगों पर बहस करा रही थी.
उसका असर समाज में क्या हुआ? सब्जी बेच रहा कोई अजीजुर्रहमान हिन्दू बहुल क्षेत्र से भगाया गया तो किसी मुस्लिम सब्जी वाले का आधार कार्ड चेक करके उसके साथ मा’रपी’ट की गयी तो बोहरा समाज की किसी परंपरा को दिखाकर बर्तन चाटकर कोरोना फैलाते दिखाया गया.

उस लॉकडाउन-1 और 2 का काल केवल मीडिया के मुजरे के कारण मुस्लिमों के खिलाफ नफ’रत के चरम पर था. तब जबकि कोरोना से लड़ा’ई लड़’ने में सारी उर्जा लगानी चाहिए थी.

सारी दुनिया जब कोरोना से ल’ड़ने में अपनी सारी ताकत लगा रही थी, तब हमारे देश में सारी ताकत तबलीगी जमात के जरिए मुसलमानों के खिलाफ नफर’त फैलाने में लगाई जा रही थी. यही कारण है कि पूरी दुनिया में कोरोना ख’त्म हो रहा है और अपने देश में आज 69000 केस प्रतिदिन सामने आ रहे हैं.

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

मो. जाहिद के फेसबुक वाल से साभार