ताहिर हुसैन के खिलाफ मीडिया ने चलाई फर्जी खबर, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कहा ऐसा कोई कबूलनामा दर्ज…

भारतीय मीडिया का स्तर दिनों दिन गिरता ही जा रहा है. मीडिया का व्यवहार बेहद ही गैरजिम्मेदाराना होता जा रहा है. कई मामलों में तो ऐसा लगता है, मानों मीडिया व्हाट्सअप पर आने वाले मैसेज को ही अपना सोर्स बनाती है. पिछले काफी समय से मीडिया बड़े पैमाने पर झूठ और अफवाह फैलाती रही है. ऐसा ही कुछ मीडिया ने एक बार फिर से दोहराया है. मीडिया ने दिल्ली दं#गों से जुड़े एक मामले में झूठा दावा करते हुए खबरें चला दी.

हाल ही में मीडिया ने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन ने ही दिल्ली दं#गों की साजिश रची थी और वहीं इस फसाद के मास्टरमाइंड थे. इतना ही नहीं मीडिया ने दावा किया कि हुसैन ने अपना जुर्म कबूल कर पुलिस को कबूलनामा भी दे दिया है.

लेकिन मीडिया के एक बड़े धड़े द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह से झूठ निकला. The Quint के मुताबिक इसे लेकर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बताया है कि ताहिर हुसैन के दिल्ली दं#गों में कथित भूमिका को लेकर कोई भी कबूलनामा रिकॉर्ड नहीं हुआ है.

क्राइम ब्रांच ने यह जानकारी आरटीआई यूनिफाइड पीपल्स मूवमेंट के चेयरमैन निलिम दत्ता द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में दी है. DCP (क्राइम) और पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर जॉय तिर्की ने आरटीआई के जवाब में कहा है कि CrPC के सेक्शन 164 के तहत कोई भी कबूलनामा या बयान दर्ज नहीं हुआ है.

बता दें कि CrPC का सेक्शन 164 जांच या कोर्ट में सुनवाई प्रारंभ होन३ए से पहले बयान या कबूलनामा दर्ज कराने से सम्बंधित है. इसके तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दिया बयान ही कोर्ट में मान्य होता है, यानि पुलिस को दिया बयान कोर्ट में मान्य नहीं होता है.

आरटीआई में सवाल किया गया था कि क्या ताहिर हुसैन ने दिल्ली दं#गों की योजना और उसे अंजाम देने जैसा कोई कबूलनामा दिया है? अगर ऐसा कोई कबूलनामा हुआ है तो कब और किस मजिस्ट्रेट के सामने?

 

आपको बता दें कि मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि आप के पार्षद हुसैन ने राजधानी में हुए दं#गे को कराने का जुर्म कबूल लिया है. मीडिया ने यह दावा करते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट का हवाला दिया था.

बता दें कि चार्जशीट के अनुसार पुलिस ने बताया है कि ताहिर हुसैन ने पुलिस को बयान दिया है कि मैंने खालिद सैफी और उमर खालिद के जानकारों की मदद से दं#गों की साजिश रची थी और दं’गों को दौरान मैंने अपने परिवार को किसी दूसरी और सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया था. यह सिर्फ पुलिस का एक दावा मात्र है कोई कबूलनामा नहीं.