VIDEO: तनिष्क विज्ञापन अगर रिवर्स करके दिखाते तो क्या होता?

VIDEO: तनिष्क विज्ञापन अगर रिवर्स करके दिखाते तो क्या होता?

टाटा समूह की आभूषण ब्रैंड कंपनी तनिष्क ने अपना विवा’दास्पद विज्ञापन अपने कर्मचारियां की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ह’टा लिया है. लेकिन इसके बाद अब वि’रोध करने वाले समूह का कहना है कि तनिष्क द्वारा इस विज्ञापन के लिए माफ़ी भी मांगनी चाहिए. तनिष्क ने अपने विज्ञापन में अलग-अलग समुदाय के शादीशुदा जोड़े का दिखाया था और इसमें एक मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू की गोद भराई की रस्म कराई जा रही थी.

इसे लेकर बीजेपी की आईटी और सोशल मीडिया कमेटी के सदस्य रह चुके खेमचंद शर्मा ने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं लेकिन यह विज्ञापन पूरी तरह से गलत है. इस विज्ञापन में क्रिएटिव हेड का नाम आ रहा है जो मुस्लिम हैं, उन्हें ऐसा विज्ञापन बनाने की क्या ज़रूरत थी?

इसके साथ ही शर्मा ने विज्ञापन को रिवर्स यानी उल्टा करके दिखाने की बात पर ज़ोर दिया. इस पर जब बीबीसी ने उन से सवाल किया कि आप इसे रिवर्स दिखाने की बात क्यों कर रहे हैं? जब आपको एक मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू होने पर एकता नहीं दिखती तो आपको इसे उल्टा करके दिखाने में कैसी एकता नजर आ जाएगी?

इस पर जवाब देते हुए खेमचंद शर्मा ने कहा कि इस विज्ञापन में अभिनेत्री शबाना आज़मी को खूबसूरती नज़र आ रही है. लेकिन वो राहुल कोठारी की मौ’त पर चुप्पी साधे हुए हैं. जिन्हें सिर्फ इसलिए मा’र दिया गया क्योंकि उनकी दोस्ती एक मुस्लिम लड़की के साथ थी. जिस दिन उसकी मौ’त हुई उसी दिन यह ऐड आया और ये लिंक्ड है.

उन्होंने आगे कहा कि तो फिर इसे रिवर्स करके दिखाइए ना. फिर देखते हैं कि शबाना आज़मी या कांग्रेस के वो बड़े नेता जिन्हें अभी इसमें सुदंरता नज़र आ रही है, रिवर्स होने के बाद उन्हें उसमें सुंदरता दिखाती हैं या नहीं?

इसी के साथ उन्होंने इस विज्ञापन को वापस लेने के तनिष्क के फैसले को सही ठहराते हुए इसके लिए तनिष्क से माफ़ी मांगने की मांग भी की है. वो कहते हैं कि अगर आगे भी इस तरह के विज्ञापन आएंगे तो उनका भी इसी तरह से शालीनता के साथ विरोध किया जाएगा.

आपको बता दें कि यह कोई पहला विज्ञापन नहीं है जिस पर इस तरह से हंगा;मा हुआ है. इससे पहले भी कई विज्ञापन हंगा’मे और विवा’दों की भेंट चढ़ते रहे है. सोशल मीडिया पर किसी भी चीज़ को गलत या सही बताने का कोई पैमाना नहीं है, क्योंकि वो महज एक ग्रुप की आवाज़ होती हैं पूरी जनता की नहीं होती हैं.

साभार- बीबीसी