बड़ी खबर: ताजमहल में नमाज़ पढ़ने पर लगी रोक, बुज़ु करने के टैंक को बंद किया

नई दिल्लीः दुनिया के 7 अजूबों में शामिल ताजमहल में अब शुक्रवार की नमाज के अलावा रोजाना होने वाली नमाज पर रोक लगा दी है। इसी साल जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज के दौरान बाहरी लोगों पर रोक लगा दी थी। अब पुरातत्व विभाग ने स्थानीय मुस्लिमों से भी अनुरोध किया है कि वे ताज की शाही मस्जिद में न आएं। मौलाना उजैर ने शाही मस्जिद में नमाज पर रोक लगने की बात पक्की बताई है। उनका कहना है कि आगरा के मुसलमान इससे बहुत खफा हैं। यहां ईद, बकरीद और रमजान पर भी दूर-दूर के नमाजी आते थे।

नमाज़ के दौरान बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित

आप को बता दे इसी साल जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर जारी करते हुए कहा था कि ताजमहल की गिनती संरक्षित इमारतों में होती है इस कारण इसकी सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं बता दें कि ताजमहल विश्व के सात अजूबों में शामिल है पुरातत्व विभाग के इस फैसले से मुस्लिम समुदाय में रोष व्याप्त है, हर शुक्रवार को ताजमहल स्थानीय नमाजियों के लिए खोला जाता है, और बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित होता है।

शुक्रवार यानि जुमे की नमाज के समय में नमाजियों के लिए ताज परिसर में प्रवेश मुफ्त होता है, यहां पहुंचकर नमाजी नमाज़ अदा करते थे बाकी अन्य दिनों में प्रवेश के लिए एंट्री फीस देनी होती है।

मुसलमानों ने शुरू किया विरोध

ताज परिसर में शुक्रवार को जुमे की नमाज बंद होने के बाद एक और फैसले से स्थानीय मुस्लिमों ने नाराजगी जताई है। सोमवार को बड़ी संख्या में एकजुट होकर मुस्लिम कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां उन्होंने एडीएम सिटी से ऐसे आदेश को हटाने की बात कही।

वजू कर रहे लोगों को भगा दिया गया

मस्जिद के इमाम सैयद सादिक अली के मुताबिक उन्हें अधीक्षण पुरातत्व विद बसंत स्वर्णकार और सहायक संरक्षण पुरातत्व अंकित नामदेव आदि ने नमाज करने से रोका। सादिक ने कहा कि नमाज के बीच में आकर वहां के वजू टैंक में नमाज के लिए वुजू कर रहे लोगों को भगा दिया गया। जबकि, रमजान में तराबी के साथ जुमा की नमाज और रोजाना नमाज यहां होती रही है।

ताज को बताया तेजोमहालय मंदिर

ताज परिसर में नमाज पड़ने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति ने अक्टूबर 2017 में ताजमहल में होने वाली नमाज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इस समीति की मांग थी कि ताजमहल एक राष्ट्रीय धरोहर है, तो क्यों मुसलमानों को इसे धार्मिक स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है।

अगर परिसर में नमाज पढ़ने की इजाजत है तो हिंदुओं को भी शिव चालीसा का पाठ करने दिया जाए। मालूम हो कि कई संगठनों ने ताजमहल को शिव का तेजोमहालय मंदिर बताया था।