लॉकडाउन में जिंदगियों को खतरे में डाल शराब की दुकानों पर ‘नोटबंदी काल’ जैसा हाल, इसके पीछे ये है बड़ी वजह…

भारत में कोरोना वायरस का खतरा अभी टला नहीं है. इसे फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ाया गया है. लेकिन लॉकडाउन 3.0 की शुरुआत होते ही केंद्र सरकार ने शराब की दुकानें खोलने के आदेश दे दिए है. जिसके चलते देश भर में सोमवार सुबह शराब की दुकानों के बाहर भारी भी’ड़ देखने को मिली। कई जगह सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो हुई तो कई जगह उसकी धज्जियां उड़ाई गई।

वही दिल्ली के लक्ष्‍मी नगर में शराब की दुकानों के बाहर भारी भी’ड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को ला’ठीचार्ज तक करना पड़ा शराब की दुकानों पर बढ़ती भी’ड़ को देखते हुए दिल्‍ली पुलिस ने पूर्वी दिल्‍ली में शराब की सारी दुकानें बंद करा दिया। जबकि बाहरी-उत्तर दिल्ली जिला, नेरला, अलीपुर, सोनीपत हरियाणा बार्डर में पुलिस ने शराब की दुकान खुलने ही नहीं दी गई थी।

सोमवार को कई जगह तो दुकानें खुलते ही लोग कतार में खड़े दिखे इनमें से ज्यादातर के हाथ में थैले थे कुछ ने तो हाथ में प्लास्टिक के कट्टे भी ले रखे थे और वे अपनी अपनी पसंद की शराब उनमें ले जाते दिखे इन दुकानों के बाहर ‘नोटबंदी काल’ जैसा हाल था। बेहद लंबी-लंबी कतारें लगी थीं। लोग एक बोतल की चाह में घंटों तक कड़ी धूप में खड़े रहे कई जगहों पर नियम का पालन नहीं करने पर पुलिस ने सख्ती दिखते हुए कुछ लोगों को ल’ठिया भी मा’रीं।

आपको बता दें केंद्र सरकार ने अपनी एडवाइजरी में ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन में कुछ शर्तों के साथ शराब की दुकानें खोलने की अनुमति दी है. इसी के तहत देश के तमाम शहरों और कसबों में शराब की दुकानें खोली गईं. लेकिन इन दुकानों के खुलने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आईं।

हलाकि दिल्ली में पुलिस ने सभी शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश तक दे दिया लेकिन सवाल ये है कि कोरोना वायरस के सं’क्रम’ण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं तो केंद्र और राज्य सरकार शराब की दुकानों को खोलने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है।

इस सवाल का जवाब शराब की बिक्री से होने वाली राज्यो की कमाई है. हालांकि, राज्यों को कितनी कमाई होती है, जो कोरोना के खतरे को दरकिनार रखकर शराब की दुकानों को खोलने पर आमादा है।

केंद्र सरकार ने पहले और दूसरे लॉकडाउन में शराब की दुकानों को बंद रखने का ऐलान किया था. इसके बाद से कई राज्य लगातार शराब की बिक्री की अनुमति देने की मांग कर रहे थे. कुछ राज्य तो इसकी होम डिलीवरी भी कराने के पक्ष में थे. ऐसे में केंद्र ने तीसरे लॉकडाउन में राज्यों की सिफारिश पर दुकानों को खोलने का फैसला किया।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो लॉकडाउन में शराब की बिक्री रुकने से हर रोज करीब 700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. दरअसल, राज्य सरकारों को स्टेट जीएसटी, भू राजस्व, पेट्रोल डीजल पर लगने वाले वैट, शराब पर लगने वाले एक्साइज और अन्य टैक्सों से कमाई होती है. अकेले शराब से राज्यों को 15-30% आय होती है. जो कुल राजस्व का बड़ा हिस्सा होता है।

2019 के इन दिनों के आंकड़े को देखें तो लॉकडाउन के 40 दिनों में राज्यों को 27 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. हाल ही में राजस्थान में शराब पर एक्साइज टैक्स 10 फीसदी बढ़ा दिया गया। यहां अंग्रेजी शराब पर टैक्स 35 से 45 फीसदी तक हो गया। यानी 100 रुपए की शराब खरीदने पर ग्राहक 35-45 रुपए सरकार को देते हैं।

अगर पिछले साल शराब बिक्री की बात करें तो सबसे ज्यादा कमाई यूपी को हुई शराब की बिक्री से वित्त वर्ष 2019-20 में महाराष्ट्र को 24,000 करोड़ रु, उत्तर प्रदेश को 26,000 करोड़, तेलंगाना को 21,500 करोड़, प बंगाल को 11,874 करोड़, राजस्थान को 7,800 करोड़, पंजाब को 5,600 करोड़, दिल्ली को 5,500 करोड़ रुपए की कमाई हुई है।

हलाकि पूरे भारत में शराब की बिक्री नहीं होती भारत के चार राज्यों गुजरात, बिहार, मिजोरम और नागालैंड में काफी पहले से शराबबंदी लागू है. 1996 में हरियाणा में शराबबंदी लागू की गई थी। लेकिन इसे 1998 में हटा लिया गया था सरकार का अनुमान था कि शराबबंदी से उस दौरान हरियाणा को राजस्व में 1200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

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