नागरिकता कानून के विरोध में औंधे मुंह गिरे मीडिया चैनलों के ये एंकर

नई दिल्लीः नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देशभर के कई राज्यों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। देश के कई हिस्सों में CAA और NRC के विरोध में कई हिं’सक प्रदर्शन भी हुए हैं। जिसके चलते कई लोगो की मौ’त हो चुकी है। वही इस कानून के विरोध में हुई हिं’सा के दौरान सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में मौ’त हो चुकी हैं.

साथ ही भारी संपत्ति का नुकसना हुआ है। जिसको लेकर यूपी सरकार ने प्रदर्शनकारीयो से संपत्ति कुर्की करने के आदेश भी जारी कर दिए है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के विभिन्न शहरों में करोड़ों की संख्यां में प्रदर्शनकारी सड़को पर उतरे हुए हैं।

दिल्ली, मुंबई, बौंगलोर के अलावे कई शहरों से रोज नागिरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें लगातार आ रही है। देश के कई बड़े विश्वविद्यालय और वहां के छात्र इन दिनों इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बने हुए हैं।

हिंदी समाचार चैनल, सिर्फ सरकार की तरफदारी कर रहे हैं

न्यूज़लॉन्ड्री.कॉम के मुताबिक कुछ इलेक्टॉनिक मीडिया चैनल दिन रात सरकार के बचाव में लगे हुए हैं। अलीगढ़ विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के छात्रों की बातें राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच पाई है।

छात्रों को सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। लेकिन मीडिया सरकार से सवाल पूछने के वजाए सरकार को बचाने का काम करता रहा।

वहीँ इन विश्वविद्यालय में पुलिस की बर्बरता की गवाही दे रहे ऐसे तमाम वीडियो सामने आए जिसमें एक छात्र को बचाते हुए तीन छात्राओं को देखा जा सकता है।

भारतीय मीडिया का स्तर गिर चुका है

इसके अलावे कई सारे और वीडियो आये हैं। देश भर में हो रहे इन प्रदर्शनों को अगर आप हिंदी टेलीविजन समाचार चैनल पर देखेंगे तो वहां एक अलग हीं कहानी नजर आती है। सभी समाचार चैनल प्रदर्शन के उद्देश्य और वैधता पर सवाल खड़े करते नज़र आते है।

किसी भी प्रदर्शन को अगर बदनाम करना है तो इसके लिए सबसे अच्छा तरीका ये है कि घोषित कर दिजिए कि प्रदर्शनकारियों ने ही हिं’सा भ’ड़का’ई। ऐसा करने से किसी भी मुद्दे को दरकिनार करना आसान हो जाता है।

जामिया में हुए प्रदर्शन के अगले दिन हीं जी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी ने अपने शो डीएनए में वो फुटेज दिखाए जिसमें एक समुह द्वारा बस पर ह’मला करते हुए दिखाया गया था।

सरकार के खिलाफ हर विरोध को बदनाम करती हिं’सा

उसके अलावा कई और भी इसी तरह के वीडियो को दिखाया गया ताकि इस प्रदर्शन को दं’गे के रूप में वो दिखा सके। वही न्यूज 18 की भी कहानी जी न्यूज जैसी ही है।

उसके अलावा सुदर्शन न्यूज, न्यूज नेशन सबकी कहानी एक जैसी दिखती है। हिंदी समाचार चैनलों ने विपक्ष को लोगों को इस कानून को लेकर भ्रमित और गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।

देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था, नोटबंदी, नौकरियों, शिक्षा, स्वस्तथा, से लेकर कृषि तक, हिंदी टीवी चैनलों ने सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई है.

इन तमाम टीवी चैनलों के एंकर, पूर्ण रूप से सरकारी पीआर मशीनरी के एक हिस्से की तरह काम कर रहे हैं. जिनका एकमात्र उद्देश्य प्रधानमंत्री की प्रशंसा करना है चाहे उसके लिए किसी की अवैध, अतार्किक आलोचना ही क्यों न करना पड़े।

अब जब नागरिकता कानून के संशोधन के खिलाफ पूरे देश में विरोध हो रहा है, टीवी मीडिया का एक बड़ा वर्ग चौबीसो घंटे सरकार के बचाव में लगा हुआ कुछ हिंदी टीवी चैनलो का यही फॉर्मेट बन गया है.

यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दर्जनों लोगों की मौ’त और पुलिस द्वारा लोगों के घरों में घुसकर तां’डव करने की ख़बरों को भी ये चैनल चुनिंदा रूप से भ’ड़काऊ और प्रदर्श’नकारियों द्वारा प’थरा’व किये जाने की घ’टनाओं को दिखाते रहे।

स्पष्टीकरण: यह लेख स्वतंत्र लेखक और स्तंभकार का है, जिसे न्यूज़लॉन्ड्री.कॉम से लिया गया है. ऐसी किसी चीज की जवाबदेही या उत्तरदायित्व 24वायरलपेज.कॉम नहीं होगा.

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