VIDEO: दिल्ली में दं’गों रोका जा सकता था पूर्व पुलिस कमिश्नर के खुलासे से मचा ह’ड़कंप, सवालों के घेरे में मोदी सरकार

उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, सीलमपुर, ओल्ड मुस्तफाबाद, भजनपुरा, चांद बाग आदि इलाके बीते 24-25 फरवरी को भ’ड़की हिं’सा के बाद से ही श’वों के मिलने का सिलसिला जारी है। रविवार को भी नाले से तीन श’व बरामद किये हैं, जिसमें एक श’व गोकुलपुरी नाले से, जबकि दो श’व भागीरथी विहार के नाले से बरामद हुए हैं।

दिल्ली में भ’ड़की हिं’सा में अब तक म’रने वालों की संख्या 45 पहुंच गई है। हालांकि दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि रविवार को जो तीन शव नालों से मिले हैं उनका संबंध दिल्ली दं’गों से है या नहीं। पुलिस ने श’व को नाले से बाहर निकाल लिया है और मामले की जांच में जुटी है।

वही दिल्ली में अचानक भ’ड़की हिं’सा पर दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त अजय राज शर्मा ने कहा की अगर मैं दिल्ली का पुलिस कमिश्नर (आयुक्त) होता तो शाहीन बाग में सड़क पर प्रदर्शन करने वालों को पहले ही दिन सड़क से किसी और जगह सिफ्ट कर देता। चाहे जो होता किसी भी कीमत पर जाफराबाद आदि इलाके को मैं जलने नहीं देता। भले ही सरकार मुझे निकाल कर बाहर कर देती।

बता दें पूर्व पुलिस आयुक्त अजय राज शर्मा यूपी कैडर 1966 बैच के पूर्व द’बंग आईपीएस और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे हैं। देश की पुलिस को एसटीएफ देने का श्रेय भी अजय राज शर्मा को ही जाता है। अजय राज शर्मा दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सेवा-निवृत्त महानिदेशक हैं।

हलाकि पूर्व पुलिस आयुक्त अजय राज शर्मा इन दिनों अपनी किताब बाइटिंग द बुलेट के कारण चर्चाओं में हैं शर्मा ने आगे कहा, दिल्ली में पुलिस नहीं, मजाक बन गई है। अगर आप दिल्ली पुलिस के इस वक्त कमिश्नर होते तो भला क्या करते?

 

पूछे जाने पर अजय शर्मा ने कहा, जिस दिन 100-50 लोग शाहीन बाग में रास्ता घेरकर बैठे थे, मैं उसी दिन उन सौ-पचास लोगों को सड़क से किसी पार्क में ले जाकर बैठा दिया होता।

दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त ने बिना किसी लाग लपेट के कहा, सच यह है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिं’सा 24-25 मार्च को अचानक नहीं फैल गए। पहले शाहीन बाग की जमीन तैयार हुई। उसके बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के लिए जिस नेता ने बे रोकटोक भ’ड़काऊ बोल बोले, इसकी शुरुआत यही से हुई।

अपनी 40 साल की पुलिसिया जिंदगी पर हाल ही में बाइटिंग द बुलेट लिखने वाले पूर्व आईपीएस अजय राज शर्मा के ही अल्फाजों में, मैंने जो कुछ मीडिया से देखा सुना है उसके हिसाब से तो दिल्ली के इन दं’गों में पुलिस मूक दर्शक बनी रही। वजह क्या थी यह दिल्ली पुलिस और हुकूमत मुझसे ज्यादा जानती है।

इस दौरान पूर्व आईपीएस ने कहा की, मुझे तो लगता है कि पुलिस किसी दबाव और भ्र’म में थी। जैसे ही सां’प्रदा’यि’क भा’वनाओं का घड़ा भरा, असामाजिक त’त्वों ने उस घड़े को दं’गों के रूप में फोड़ डाला।

वही इस हिं’सा पर दिल्ली पुलिस पर उंगली उठाते हुए अजय राज शर्मा ने कहा, जिला डीसीपी ने इलाके में कर्फ्यू तो लगाया, मगर बहुत देर बाद में और कम फोर्स के बलबूते। कम फोर्स के कं’धों पर कर्फ्यू लगाना भी जिला पुलिस को उल्टा पड़ गया।

2000 के दशक में दिल्ली के दबंग पुलिस कमिश्नर रहे अजय राज शर्मा ने विशेष बातचीत के दौरान दो टूक कहा, मैंने पुलिस की नौकरी में हमेशा कानून देखा। मैंने वर्दी में हमेशा कानून को ही ऊपर रखा। सरकार को कभी कानून से ऊपर जाकर अहमियत न देनी चाहिए न मैंने कभी ऐसी गलती की।

इतिहास गवाह है। मैं अपने मुंह और कुछ सच उगलूंगा तो लोग कहेंगे कि अब ज्यादा बोल रहे हैं। कभी दिल्ली पुलिस की कमिश्नरी रह चुके अजय राज शर्मा ने कहा, दिल्ली पुलिस को मैंने लीड किया। अब मुझे उत्तर पूर्वी जिले के दं’गे से बहुत तकलीफ हुई है।

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