दो फ़ो’रमूले से बिहार गठबंध’न पर लग जाएगी पक्की मोहर, पूरी तरह टल सकता हैं टू’टने का ख़’तरा

लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चूका है. 2019 का यह लोकसभा चुनाव बेहद खास होने वाला है. देश भर की पूरी विपक्षी ताकतें हर हाल में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर खदेड़ना चाहती है. कांग्रेस करीब दो साल से इसके लिए महागठबंधन बनाने के प्रायस में जुड़े हुए है लेकिन इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका. कांग्रेस कई राज्यों में गठबंधन के साथ उतरना चाहती है लेकिन दिक्कत यह है कि कोई भी क्षेत्रीय पार्टी अपने राज्य में कांग्रेस को बड़ा भाई मानने तैयार नहीं हैं और कांग्रेस छोटा भाई बनना नहीं चाहती हैं.

कांग्रेस ने तमाम चुनौतियों से निपटते हुए कई राज्यों में गठबंधन कर लिए है लेकिन कई राज्यों में सीट बंटवारे को लेकर पेंच फंसा हुआ है. ऐसा ही कुछ बिहार में हुए महागठबंधन में देखने को मिल रहा है. महागठबंधन में शामिल दल सीट शेयरिंग को लेकर जिद पकड़ के बैठ गए है और कोई भी पीछे नहीं हो रहा है.

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लेकिन खबर है कि अब यह गठ सुलझ सकती है. आरजेडी और कांग्रेस के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति बनाने की कोशिशें की जा रही है. इसे लेकर 13 और 14 मार्च को लगातार महागठबंधन में शामिल दलों के बीच बैठकें होने वाली है जिसमें सर्वमान्य फॉर्मूला निकाल लिया जाएगा.

न्यूज 18 को विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दो तरह के फॉर्मूले पर बातचीत की जा रही है. पहले फॉर्मूले के अनुसार लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी-20, कांग्रेस-11, उपेंद्र कुशवाह की पार्टी आरएलएसपी-3, जीतन राम मांझी की पार्टी हम-2 , लेफ्ट- 2, वीआइपी -1 और शरद यादव की पार्टी एलजेडी- एक सीट पर चुनाव लड़ सकती हैं.

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वहीं सीट बंटवारे को लेकर दूसरे फ़ॉर्मूले पर भी विचार किया जा रहा है. जिसके तहत आररजेडी 18 से 20, कांग्रेस 10 से 12, आरएलएसपी- 3, मुकेश सहनी की वीआईपी- 1, शरद यादव की लोजद- 1 (मधेपुरा), हम-1 (गया/जमुई), सीपीएम/सीपीआई(माले) – 2 (आरा/जहानाबाद) और सपा/बसपा-2 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है.

वहीं खबर यह भी है कि आरजेडी ने उपेंद्र कुशवाहा, शरद यादव, मुकेश साहनी और जीतन राम मांझी को एक-एक उम्मीदवार अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ाने का ऑफर भी दिया गया है. माना जा रहा है कि एक दो दिन में सीट बंटवारें को लेकर फैसला ले लिया जाएगा.