नागरिकता कानून के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट में लाने के लिए केंद्र सरकार ने शीर्ष न्यायालय में दायर की याचिका

केन्द्र ने शीर्ष अदालत में बुधवार को एक याचिका दायर कर नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता के खिलाफ देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर याचिका को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरण की बात कही। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र से कहा कि उनकी स्थानांतरण याचिका पर 10 जनवरी को सुनवाई की जायेगी।

हालांकि पीठ ने ये भी कहा कि उनका मत है कि नागरिकता संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की उच्च न्यायालयों को सुनवाई करनी चाहिए और अगर इस मामले में परस्पर विरोधी मत हुए तो हम इस पर गौर करेंगे। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर कहा कि उच्च न्यायालयों द्वारा परस्पर विरोधी दृष्टिकोण अपनाने से समस्या हो सकती है और इससे संबंधित कार्यवाही में शामिल होने के लिए अलग-अलग राज्य से वकीलों को भी दौरा करना पड़ सकता है।

इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के मामलों की सुनवीई के लिए वकीलों का अलग-अलग राज्यों में जाना उसकी प्राथमिकता नहीं है। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि इसी तरह की एक याचिका कर्नाटक उच्च न्यायालय में वृहस्पतिवार को सूचीबद्ध है। इस पर न्यायालय ने शुक्रवार को इस स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करने की बात कही।

आपको बता दें की नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता की विवेचना के लिए शीर्ष अदालत 18 दिसंबर को तैयार हो गया था, लेकिन इसके अमल पर उसने रोग लगाने से इंकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने नागरिकता संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी कर इसे जनवरी के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए क्रमबद्ध कर दिया था।

शीर्ष अदालत में जिन लोगों ने इस कानून को चिनौती दिया है उनमें कांग्रेस के जयराम रमेश, राजद के नेता मनोज झा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, पीस पार्टी, गैर सरकारी संगठन रिहाई मंच, सिटीजंस अगेन्स्ट हेट, अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और कानून के छात्र शामिल है।

आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून में 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आये हिन्दु, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।