सावरकर ने अपने साथियों के साथ मिलकर किया था मस्जिद पर हम’ला, चार लोगो की हुई थी मौ’त

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के चलते बीजेपी द्वारा अपने मेनिफेस्टो में जब से विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न दिलाने का वादा किया गया है जब से विनायक दामोदर सावरकर सोशल मीडिया, न्यूज़ आदि पर खूब चर्चाओं में बने हुए हैं| बीजेपी के वादे के बाद मनो वीडी सावरकर की ख़बरों की बाढ़ आ गयी है जिसके चलते आये दिन नए नए खुलासे सामने आ रहे हैं| अभी हाल ही में भी सावरकर के छात्र जीवन का एक बड़ा खुलासा सामने आया है जिसने सबको हिला कर रख दिया है|

दरअसल आपको बता दें कि सावरकर ने अपने छात्र जीवन में ही एक बार मस्जिद तोड़’ने की साजि’श रचने का खुलासा हुआ है जिसके चलते अब वीडी सावरकर हर देश प्रेमी और मुस्लि’म समुदाय की नज़रों से उतर चुके हैं|

जानकारी के मुताबिक़ आपको बता दें कि वीडी सावरकर ने अपने छात्र जीवन में मस्जिद तोड़’ने की गुप्त साजि’श रच अपने साथियों के साथ मिलकर एक मस्जिद पर हम’ला कर दिया था|

बता दें कि ऐसा उन्होंने इसलिए किया था क्योंकि वे तब हिंदुओं के रुख से बहुत खफा थे और इसके चलते आजिज आकर उन्होंने मस्जिद पर हम’ला बोल दिया था और फरार हो गए थे। यह कोई अफवाह या मनघडंत कहानी नहीं है बल्कि इसका जिक्र खुद सावरकर के जीवन पर लिखी गई विक्रम संपत की किताब सावरकर में मिलता है।

पेंग्विन रैंडम हाऊस इंडिया द्वारा प्रकाशित इस किताब के मुताबिक यह वाकया 1890 के दौर का है। इन दिनों महाराष्ट्र धुव्रीकरण की राजनीति में बुरी तरह से फसा हुआ था। मुंबई प्रेसिडेंसी में जगह-जगह दंगे भड़क रहे थे जिसके चलते कभी गणपति कार्यक्रम के दौरान माहौल खराब होता, तो कभी मांस और अंडा का मुद्दा बनाकर दंगे भड़क जाते थे।

बता दें कि 6 फरवरी 1894 को नासिक के येवला स्थित मस्जिद में कथि’त तौर पर सुअर का कटा सिर फेंक दिया गया था। इसी के कुछ वक्त बाद खबर मिली थी कि सुअर के मांस वाली घट’ना के जवाब के चलते मंदिर में गोह’त्या कर दी गई। इलाके में इसके बाद तनाव पनपा और सुरक्षा मुस्तैद की गई।

इसी के चलते मस्जिद और मंदिर फूंक’ने की साजिश रची जाने की खबर सामने आने लगीं इसी बीच, हिं’सा में चार लोगों की जा’न भी चली गई थी। किताब में बताया गया कि उस दौरान होने वाले दोनों समुदायों के बीच हिंसा’ओं के पीछे एक और कारण भी था। वह था- मस्जिदों के बाहर हिंदुओं के कार्यक्रमों के दौरान गाने बजाना।

बता दें कि सावरकर दोस्तों के साथ उस दौरान केसरी, पुणे वैभव और अन्य प्रमुख अखबार पढ़ते थे, जिसमें उन्हें धुव्रीकरण के कारण होने वाली हिं’सा की खबरें मिल रही थीं। हर बार उन्हें हिंदुओं पर ही हम’लों की खबर मिलती थी और इसी बात पर वे अपने समुदाय से बेहद नाराज थे। साथियों संग उन्हें हैरानी होती थी आखिर इतना सब होने पर हिंदू जवाब क्यों नहीं दे रहे?

आखिर में उन्होंने दंगों का बदला लेने के लिए मस्जिद पर चंद साथियों से मिलकर ह’थिया’रों के साथ हम’ला बोल दिया था। जिसके चलते हमले में मस्जिद के कई हिस्से टूट गए थे और साथियों समेत सावरकर घट’ना को अंजाम देकर फौरन फरार हो गए थे।

इस हमले की खबर जब सावरकर के मुस्लिम सहपाठि’यों तक पहुंची तो वे काफी गुस्सा हुए। मुस्लि’म छात्रों के गुस्से से डर की वजह से सावरकर ने उस बीच कुछ वक्त के लिए स्कूल भी बंद कर दिया था।

साभारः #Jansatta