विकास दुबे को लेकर भड़के मुख्य न्यायाधीश, बोले- इतना बड़ा अपराधी था तो पैरोल कैसे मिली…

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई की जिसमें  विकास दुबे के एनका’उंटर पर सवाल उठाए गए. विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर 2 जुलाई की रात कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुलिसवालों की ह’त्या की थी. जिसके बाद से ही विकास फरार था. काफी मशक्कत के बाद 9 जुलाई की सुबह विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर में गिरफ्तार किया गया था.

अगली सुबह यूपी एसटीएफ उसे उज्जैन से कानपूर लेकर आ रही थी. लेकिन इसी दौरान कानपुर से 17 किमी. दूर ही विकास दुबे का एन’काउं’टर कर दिया गया था. इसी ए’नकाउंट’र पर सवाल उठाती एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एन’काउंटर को सही ठहराते हुए कहा कि आरोपी पैरोल पर था.

तुषार मेहता की यह दलील सुनने के बाद सीजेआई ने हैरानी जताई. सुप्रीम कोर्ट के चीज जज ने कहा कि हैरानी की बात है कि इतने केस में शामिल शख्स जमानत पर था. उसके बाद ये सब हुआ. इसके साथ ही कोर्ट ने इस पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी और कहा कि ये सिस्टम के फेल्योर को दिखाता है.

मुख्य न्यायाधीश बोबड़े ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि यह मामला हैदराबाद एन’काउं’टर से किस तरह अलग है? तब डीजीपी के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि यह मामला हैदराबाद से बहुत अलग है. जब सामने विकास दुबे जैसे शातिर अपराधी हो तो पुलिस क्या करें?

उन्होंने कहा कि पुलिसवालों के भी मौलिक अधिकार होते हैं. सुनवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब न्यायधीश भड़क उठे. दरअसल तुषार मेहता ने कहा कि विकास दुबे पर 65 एफआईआर दर्ज थी और वो पैरोल पर बाहर था.

इसी दलील पर सीजेआई भड़क उठे और कहा कि हमें मत बताइए कि विकास दुबे क्या था? अगर उस पर इतने ही केस दर्ज थे तो फिर भी वह जेल से बाहर था. यह सिस्टम का फेल्योर है. कोर्ट ने कहा कि इससे सिर्फ एक घटना दांव पर नहीं है बल्कि पूरा का पूरा सिस्टम दांव पर है.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने कहा कि सीएम और डिप्टी सीएम ने मीडिया में बयान दिए, जिससे लगता है कि एन’का’उंटर स्वाभाविक नहीं था. जिस पर सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि सीएम और डिप्टी सीएम के बयानों को भी देखा जाए और अगर उन्होंने ऐसा कोई भी बयान दिया है और उसके बाद कुछ हुआ है तो फिर इसे भी देखा जाएगा.

इसी के साथ कोर्ट ने एनका’उंटर पर जांच के लिए बनी कमिटी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज और एक रिटार्यड पुलिस ऑफिसर को शामिल करने के आदेश यूपी सरकार को दिये हैं. इस मामले में अलगी सुनवाई बुधवार को की जाएगी.

साभार- बीबीसी