वक्फ बोर्ड घोटालाः शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ‘वसीम रिज़वी’ जा सकते हैं जेल? सीबीआई जाँच के आदेश

मदरसों को आतं'कियों का अ'ड्डा बताने वाले 'वसीम रिज़वी' वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की अवैध खरीद-फ़रोख्त को लेकर जाँच के घेरे में हैं.

लखनऊ: केंद्र सरकार की हरी झंडी के बाद उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी (Wasim Rizvi) मुसीबत में फंस गये हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की अवैध तरीके से खरीद व बिक्री के मामले में वसीम रिजवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हैं. आपको बता प्रयागराज और कानपुर सहित कई शहरों में वक्फ बोर्ड की सम्पत्तियों की कथित तोर पर बिक्री और खरीदी मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथों में ले ली है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के खिलाफ इस मामले में भी एफआईआर दर्ज की है, केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने जानकारी देते हुआ कहा की राज्य सरकार ने पिछले साल दो मामलों की जांच सीबीआई से कराने की अपील की थी।

wasim rizvi

आपको बता दें उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2016 में इलाहाबाद में और 2017 में लखनऊ में दोनों एफआईआर में वसीम रिजवी के अलावा मुनाफा पाने वाले नरेश कृष्ण सोमानी, विजय कृष्ण सोमानी, और वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी गुलाम सैयद रिजवी व निरीक्षक बाकर रजा को इस मामले में आरोपी बनाया गया है. आपको बता दें सीबीआई ने प्रयागराज और लखनऊ में दर्ज FIR के बाद ये कार्रवाई की है।

वही केन्द्र सरकार ने बुधवार को दोनों मामलों की सीबीआई जांच करने की हरी झंडी दे दी है। 2017 में लखनऊ में हुई एफआईआर मामले में रिजवी और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों पर 27 लाख रुपए लेकर कानपुर में वक्फ की बेशकीमती संपत्ति का पंजीकरण निरस्त करने और पत्रावली से महत्वपूर्ण कागजात गायब करने का आरोप लगाया है।

वही अगस्त 2016 में इलाहाबाद दर्ज की गई एफआईआर में शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने इमामबाड़ा गुलाम हैदर त्रिपोलिया, ओल्ड जीटी रोड पर अवैध रूप से कई दुकानों का निर्माण कराया था। लेकिन क्षेत्रीय अवर इंजीनियर ने 7 मई 2016 को निरीक्षण के बाद पुराने भवन को तोड़कर किए जा रहे अवैध निर्माण को बंद करा दिया था।

लेकिन शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहे वसीम रिजवी बाद में फिर से निर्माण कार्य शुरू करा दिया हलाकि इसे रोकने के लिए कई पत्र लिखे गए, लेकिन फिर भी निर्माण कार्य जारी रहा। जिसके बाद रिजवी को नामजद करते हुए 26 अगस्त 2016 को एक और एफआईआर कराई गई थी। (एजेंसी इनपुट)