कौन है विकास दुबे, जिनके कारण कानपुर में गई DSP समेत आठ पुलिस वालों की जा’न, जानें History-Sheet

लखनऊ: उत्तरप्रदेश में कानपुर देहात के बिठूर थाना क्षेत्र में गुरुवार रात करीबन एक बजे दबिश देने गई पुलिस टीम पर फा’य’रिं’ग करने वाले हि’स्ट्रीशी’टर विकास दुबे पर 60 आपराधिक मामले दर्ज हैं. 17 साल पहले उसने 2003 में थाने में घुसकर राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की ह#त्या कर दी थी इसके बाद उसने राजनीति में एंट्री ली नगर पंचायत का चुनाव भी जीता था 2017 में लखनऊ में एसटीएफ ने कृष्णा नगर से उसे दबोचा था।

बता दें फा’यरिं’ग डीएसपी देवेंद्र मिश्रा और थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मी श’ही’द हो गए वहीं, इस घटना में कई पुलिसकर्मी घा’यल भी बताए जा रहे हैं. पुलिस की एक टीम हि’स्ट्रीशी’टर विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए पहुंची थी वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गो’लीबा’री कानपुर जिले के चौबेपुर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिकरू गांव में हुई है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद एसएसपी और आईजी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं. फरेंसिक टीम भी यहां छानबीन में जुट गई है. वही घटना की जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के DGP एचसी अवस्थी ने बताया कि, पुलिस विकास दुबे को पकड़ने गई थी लेकिन उन्होंने वहां GCB लगा दी थी जिससे हमारे वाहन बाधित हो गए जब फोर्स नीचे उतरी तो अ’परा’धि’यों ने गो’लि’यां चला’ई, जवाबी फा’य’रिं’ग हुई लेकिन अ’परा’धी ऊंचाई पर थे, इसलिए हमारे 8 कर्मी श’ही’द हो गए।

भारतीय राजनीति में अ’परा’धि’यों और नेताओं का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है. विकास दुबे 90 के दशक में जब इलाके में एक छोटा-मोटा ब’दमा’श हुआ करता था तो पुलिस उसे अक्सर मा’रपी’ट के मामले में पकड़कर जेल ले जाती थी. लेकिन उसे छुड़वाने के लिए स्थानीय रसूखदार नेता विधायक और सांसदों तक के फोन आने लगते थे।

विकास दुबे को सत्ता का संरक्षण भी मिला और वह एक बार जिला पंचायत सदस्य भी चुना जा चुका था. उसके घर के लोग तीन गांव में प्रधान भी बन चुके हैं. अगर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो विकास दुबे ऊपर कैबिनेट मंत्रियों तक का हाथ था.

आपको बता दें कानपुर के जिस इलाकों से विकास दुबे का रिश्ता था. दरअसल वह ब्राह्मण बहुल इलाका है लेकिन यहां की राजनीति में पिछड़ी जातियों को नेता भी हावी थे. इस हनक को कम करने के लिए नेताओं ने विकास दुबे का इस्तेमाल किया. उधर विकास की नजर इलाके में बढ़ती जमीन की कीमतों और वसूली पर था. फिर क्या था यहीं से शुरू सत्ता के संरक्षण में विकास दुबे के आ#तंक की शुरुआत हुई।

हालांकि बाद में उसका नाम कई ऐसे मामलों में सामने आया जिसमें निशाने पर अगड़ी जाति के भी नेता थे. दरअसल तब तक विकास दुबे का आ#तंक बढ़ गया था और कई नेता जिनसे विकास दुबे की पटरी नहीं खाती थी वो उसके निशाने पर आ गए थे क्योंकि उस समय इलाके में जमीनों की कीमत बढ़ने लगी थी।