अयोध्या मामले के चलते मुस्लि’म पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा- सारे सवाल हमसे ही क्यों पूछे जा रहे है ? क्या हि’न्दू पक्ष…

इन दिनों राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे सुप्रीम कोर्ट में मुक़दमे को लेकर सुनवाई अपने अंतिम चरण पर पहुँच चुकी है| जल्द ही जमीन को लेकर फैसला आने की पूरी उम्मीद है| बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में केस की सुनवाई का 38वां दिन था जिसकी सुनवाकि के दौरान मुस्लि’म पक्ष की तरफ से उनके वकील राजीव धवन ने अपनी दलीलें पेश की हैं वहीँ अब कल यानी मंगलवार से हिन्दू पक्ष की ओर से दलीलें रखी जायेगी| लेकिन आज की सुनवाई में मुस्लि’म पक्ष की ओर से पुछा गया सवाल अभी ताज़ा खबरों का रूप ले रहा है|

दरअसल आज मुस्लि’म पक्षकार के वकील राजीव धवन ने कोर्ट से सवाल करते हुए कहा- कि अदालत द्वारा सभी सवाल मुस्लि’म पक्ष से ही किए गए हैं, जबकि हिंदू पक्ष से एक भी सवाल नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान उन्हें जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला है, जो समय सीमा तय की गई थी वो काफी नहीं है।

जानकारी के मुताबिक़ अयोध्या केस में 17 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो सकती है। वहीं नवंबर में अयोध्या केस में फैसला आने की उम्मीद जतायी जा रही है। साथ ही अभी फिलहाल सुरक्षा की दृ’ष्टि से अयोध्या में 10 दिसंबर तक के लिए धा’रा 144 लागू कर दी गई है।

मुक़दमे के चलते मुस्लि’म पक्षकार वकील राजीव धवन ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं दिए गए हैं, जिनसे पता चले कि केन्द्रीय गुंबद के नीचे ही राम का जन्म हुआ। वहीं श्रद्धालुओं के वहां फूल प्रसाद चढ़ाने का दावा भी सि’द्ध नहीं किया गया है।

साथ ही धवन ने कहा कि गुं’बद के नीचे ट्रेसपासिंग कर लोग घु’स आए थे। कभी भी मंदिर तो’ड़कर मस्जिद नहीं बनायी गई, वहां लगातार नमाज होती रही थी। धवन ने मुस्लि’म पक्षकारों की तरफ से कहा कि साल 1885 से 1889 के बीच हिं’दू पक्ष द्वारा कभी जमीन पर दावा नहीं किया गया, जबकि साल 1854 से ही तत्काली’न ब्रिटिश सरकार द्वारा मस्जिद के रखरखाव का खर्च दिया जाता रहा था।

इसके साथ ही धवन ने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भी कभी ये नहीं कहा गया कि मंदिर को तो’ड़कर मस्जिद बनायी गई है। उन्होंने कहा कि वादी हिं’दू विवा’दि’त भूमि का मालिक है, इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि सिर्फ हिंदुओं को भूमि के उपयोगा का अधिकार था। उन्हें पूर्वी दरवाजे से प्रवेश करने और पूजा करने का अधिकार था, इससे ज्यादा कुछ नहीं।

वहीँ दूसरी ओर राजीव धवन की इस दलील पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि साल 1858 के बाद के दस्तावेजों से पता चलता है कि राम च’बूत’रा की स्थापना की गई और उनके पास अधिकार था तो इस पर वकील राजीव धवन ने कोर्ट में कहा कि विश्वास यात्रा स्कं’दपुरा’ण उन्हें हिं’दुओं को जमीन का मा’लिका’ना हक नहीं दे सकते, मुसलमा’नों का कब्जा कभी संदे’ह में नहीं था।

अंतिम में धवन ने कोर्ट में कहा कि मुस्लि’म पक्ष की मांग है कि अयोध्या को फिर से 5 दिसंबर, 1992 जैसा बसाया जाए, जैसा कि बाबरी मस्जिद वि’ध्वं’स से पहले था।

साभारः #Jansatta

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