क्या सिंधिया खेमे के MLA और मंत्री के इस्तीफे के बाद भी नहीं गिरेगी कमलनाथ सरकार? जानिए

भोपाल: मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी उठा पठक के बीच भारतीय जनता पार्टी के पाले में गेंद अब भी पूरी तरह से आती हुई नहीं दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक बेंगलुरू में ठहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 10 विधायक और 2 मंत्री भाजपा में जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं. उनका कहना है कि हम लोग ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए आए थे भाजपा में जाने के लिए नहीं।

हलाकि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कांग्रेस के असंतुष्ट नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी से इस्तीफे के बाद एक-एक करके 20 विधायकों ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया दिया है।

अब बड़ा सवाल यह निकल कर आ रह है कि क्या मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बची रहेगी? आपको बता दें 230 विधानसभा क्षेत्रों वाली मध्य प्रदेश की विधानसभा में फिलहाल कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं।

गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को प्रदेश की कांग्रेस सरकार के करीब दस विधायक, जिनमें सपा, बसपा, निर्दलीय सहित कुछ कांग्रेस के विधायक भी ला’पता हो गये थे. बाद में खबरें आईं कि वे भाजपा के संपर्क में हैं और भाजपा उनकी सहायता से प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिराना चाहती है।

वही सिंधिया के इस्तीफा देने के बाद समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस के 20 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं. इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बिसाहू लाल भी शामिल हैं. फिलहाल 228 विधायकों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास अपने 114 विधायकों समेत 7 अन्य का समर्थन हासिल है, ऐसे में उनके पास 121 विधायक हैं।

अगर बात करें इन इस्तीफा देने वाले 20 विधायकों की संख्या को विधासनभा की कुल सीटों में से घटा दें तो यह घटकर 208 रह जाएगी. ऐसे में बहुमत के लिए 105 सीटों की जरूरत होगी।

इसके साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि आखिर निर्दलीय, सपा और बसपा के कुल सात विधायक क्या निर्णय लेंगे यह भी विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान संख्या किस ओर मजबूत होगी. फिलहाल कांग्रेस के हर नेता की जुबां पर सरकार स्थिर है के बोल और चेहरे पर आत्मविश्वास दिख रहा है।

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