बिहार चुनाव में इस बार नए समीकरण बनते देख RJD बोली, ‘मजदूर-युवा’ करेंगे नैया पार- समझें पूरा गणित

इस बार के बिहार असेंबली चुनाव 2020 में ‘मजदूर-युवा’ वोटरों ने किस तरह से बदले चुनावी समीकरण

पटना/बिहार: बिहार चुनाव 2020: बिहार में विधानसभा चुनावों के बाद आज वोटों की गिनती चल रही है. शुरूआती रुझानों में महागठबंधन को बड़ा फायदा मिलता दिखाई पड़ रहा है. जिससे साफ तौर पर तेजस्वी यादव के रोजगार देने वाले वादे को बड़ा फैक्टर माना जा रहा है. इसके साथ ही आरजेडी को कोविड-19 के दौरान नीतीश कुमार की सरकार के मिसमैनेजमेंट का भी फायदा भी मिलता नजर आ रहा है.

अब तक के रुझानों में महागठबंधन को फायदा मिलता नजर आ रहा है. वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया है कि इस बार एनडीए भारी सं’कट में पड़ता नजर आ रहा है. तेजस्वी यादव ने इस चुनाव में मजदूर-युवा के अजेंडे पर वोट मांगे है.

क्या तेजस्वी का 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा काम कर गया.

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एक बीजेपी नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ ऐंटी इनकंबेंसी है तो किसी तरह मैनेज किया जा सकता है लेकिन अगर लोगों के मन में एनडीए के खिलाफ गुस्सा है तो वास्तव में हम बिहार में संकट में हैं.

वहीं ग्राउंड रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि ऐंटी इनकंबेंसी बड़ा फैक्टर रहा है. बहुत सारे वोटर्स का मानना है कि सीएम नीतीश कुमार ने अपने वादों को नहीं निभाया है.

बिहार में लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की बदहाली जैसी गंभीर समस्या देखने को मिल रही है. साथ ही लॉकडाउन के बाद रोजगार का संकट, युवाओं के रोजगार के मुद्दे को तेजस्वी यादव ने भुनाया और रोजगार के वादे के साथ चुनावी मैदान में उतर कर लोगों का मन बदलने में कामयाब होते नजर आए.

नीतीश कुमार के शासन में उद्योगों और फैक्ट्रियों की हालत खराब हो गई है जो नीतीश के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा. वहीं लॉकडाउन के दौरान करीब 40 लाख लोग बिहार में वापस लौटने पर मजबूर हुए जिन्हें बिहार सरकार ने कोई सहायता मुहैया नहीं कराई.

इसके आलावा बिहार में शिक्षकों के अलावा पिछले काफी वक्त से कोई सरकारी भर्ती नहीं हुई है. इसके आलावा कई परीक्षाएं संपन्न होने के बाद भी नियुक्ति नहीं हो सकी हैं.

ऐसे वक्त में तेजस्वी यादव ने सूबे में 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया जो काम कर गया है. एक युवा ने कहा कि 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा सच तो नहीं लगता है लेकिन मुद्दा यह है कि नीतीश सरकार में भर्तियों पर रोक क्यों लगाई है. तेजस्वी ने शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में वृद्धि का वादा भी किया है.

साभार- जनसत्ता