जब सऊदी अरब महिलाओं के अधिकारों के हित में खुद आगे आ रहा है तो ऐसे में इस महिला सोशल एक्टिविस्ट को जेल क्यों हुई?

बीते 2 सालों में सऊदी अरब ने महिलाओं के अधिकारों को काफी बढ़ावा दिया है, ऐसे में महिलाओं की आवाज़ उठाने वाली इस लड़की को जेल की सलाखों के पीछे क्यों डाला गया.

दुनिया भर में मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों के लिए मांग उठती रहती है। मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए दुनिया भर में कई संस्थाएं काम करती हैं। जो कि दुनिया भर में देखती है कि कहां मानवाधिकारों का हनन हो रहा है लेकिन हाल ही में महिलाओं के अधिकारों पर बोलने वाली अल हथलॉल क्यों चर्चा में है।

दरअसल सऊदी अरब में महिला अधिकारों की लड़ाई के लिए आवाज उठाने वाली प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता 31 साल की लूजैन अल-हथलौल (Loujain al-Hathloul) अकसरत महिलाओं के लिए बोलती रहती हैं लेकिन उन्हें सऊदी अरब में गिरफ्तार क्यों कर लिया गया इसके पीछे की कहानी काफी लंबी है।

कौन हैं लौजैन अल-हथलौल?

Alhathloul

लौजैन अल-हथलौल सऊदी अरब की एक महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं जो कि महिलाओं के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाती रहती हैं। ऐसे में जब दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों पर बात की जा रही हो तो हथलॉल की गिरफ्तारी का क्या कारण है।

बता दें कि 31 साल की हथलॉल सऊदी अरब के अंदर महिलाओं के ड्राइविंग संबंधी अधिकार तथा दूसरे और महिला अधिकारों के लिए अभियान चला रही थीं।जिसके बाद सऊदी अरब में उन्हें मई 2018 में गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि 2014 में हथलॉल को अपनी कार से सऊदी अरब की सीमा पार करने के जुर्म में 73 दिनों के लिए गिरफ्तार कर दिया गया था।

वहीं 31 साल की हथलॉल पर महिलाओं के ड्राइविंग संबंधी प्रतिबंध की अवहेलना के भी आरोप लगे थे जिसके बाद हथलॉल चर्चा में आयीं थी। हथलॉल के साथ दर्जन भर और महिला कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया था।

वहीं आपको यह भी बता दें कि इन महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद सऊदी अरब के अंदर महिलाओं के ड्राइविंग संबंधी प्रतिबंध हटा लिए गए थे जिसके बाद इन महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का जमकर विरोध हुआ था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही रिहाई की मांग

बता दें कि हथलॉल की गिरफ्तारी का अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जमकर विरोध हो रहा है। उनकी बहन ने हाल ही में ट्विटर पर लिखा कि “2 महीने में उन्हें रिहा कर दिया जाना चाहिए।

हालांकि यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका में नए राष्ट्रपति जो बाइडन के पद संभालने के बाद इसकी मांग तेजी से होने लगी है क्योंकि जो बाइडन मानवाधिकारों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात कह चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिहाई की मांग उठने के बाद अल-हथलौल की सजा को आधी करने का फैसला लिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने भी अल-हथलौल को तुरंत रिहा करने की मांग की है.

वहीं जो बाइडन के प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ट्वीट कर कहा कि “सऊदी अरब का लुजैन अल हथलौल को सामान्य रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए सजा दिया जाना अनुचित और परेशान करने वाला है।

वहीं अमेरिका के विदेश विभाग के उप प्रवक्ता केल पब्राहु ने ट्वीट कर अल हथलॉल की रिहाई की मांग की है उन्होंने लिखा “अमेरिका चिंतित है, हमें 2021 में उनकी संभावित जल्द रिहाई का इंतजार है।

आपको यह भी बता दें कि सऊदी अरब की अल हथलौल का मामला आतंकवाद निरोधी अदालत में भी सुनवाई के लिए गया था जिसने अल हथलॉल को 5 साल 8 महीने की सजा सुनाई थी लेकिन हाल ही में अदालत ने हथलॉल के अगले तीन साल में कोई अपराध नहीं करने की शर्त पर 2 साल 10 महीने की सजा निलंबित की है।

ऐसे में अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के बाद सऊदी अरब अल हथलॉल की गिरफ्तारी पर क्या रुख अपनाता है हालांकि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन मानवाधिकारों के मामलों पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर सवाल उठा चुके हैं।