लव जिहाद कानून को लेकर योगी सरकार को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने लव जिहाद मामले में हुई पहली गिरफ़्तारी पर लगाई…

उत्तर प्रदेश सरकार के लिए बढ़ी मुश्किलें, लव जिहाद कानून पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा लिखित हलफनामा

इन दिनों लव जिहाद का मामला उत्तर प्रदेश में सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार लव जिहाद पर प्रतिबंध लगाना चाहती है। इसी दिशा में प्रदेश सरकार हाल ही में धर्म परिवर्तन 2020 अध्यादेश लेकर आई है। लेकिन अब इस कानून को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के लिए अब मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

दरअसल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हाल ही में एक मामला सामने आया जिसके बाद हाई कोर्ट में दायर याचिका में यह बात सामने आई है. मुजफ्फरनगर में अक्षय कुमार त्यागी ने नदीम और उसके भाई सलमान के खिलाफ मंसूरपुर थाने में एक मामला दर्ज कराया था। जिसमें अक्षय त्यागी ने दोनों भाइयों पर यह आरोप लगाया कि नदीम और उसके भाई ने उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर अपने प्रेम जाल में फंसा लिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा लिखित हलफनामा

Yogi Government 4

वही अब अक्षय त्यागी का आरोप है कि वे दोनों मिलकर उसकी पत्नी का धर्म परिवर्तन करवाना चाहते हैं। दरअसल अक्षय त्यागी हरिद्वार कि भगवानपुर में लेबर कांट्रेक्टर का काम करता था और वहीं पर उसी के अधीन नदीम का कोई आदमी काम करता था। अक्षय त्यागी के आरोप के बाद मंसूरपुर थाने में नदीम और सलमान दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया. लेकिन अपने ऊपर लगाए गए आरोप की लड़ाई में नदीम हाईकोर्ट चला गया।

उसने मंसूरपुर थाने में दर्ज FIR के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दी. नदीम की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब यह फैसला दिया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ‘पुलिस के पास अभी कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि नदीम के द्वारा कोई बल या जबरदस्ती की प्रक्रिया अपनाई गई हो’ तथा साथ ही कोर्ट ने पुलिस को भी निर्देश दिए कि अगली सुनवाई तक पुलिस नदीम के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करेगी।

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी जानकारी के अनुसार यह गिरफ्तारी लव जिहाद कानून के तहत की गई थी।

इसके साथ ही अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से शुक्रवार तक जवाबी हलफनामा मांगा है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला लव जिहाद कानून को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।